देशभक्ति नहीं आई काम, चीन से रिकॉर्ड 11.08 लाख करोड़ रुपये का कारोबार 

मुंबई- सीमा पर तनाव के बीच भारत का चीन के साथ कारोबार 2022 में बढ़कर करीब 11.08 लाख करोड़ रुपये के अब तक के सर्वाधिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान भारत का व्यापार घाटा पहली बार 8.15 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। 

चीन के कस्टम विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच 2021 में द्विपक्षीय कारोबार पहली बार 100 अरब डॉलर के पार पहुंचा था। उस दौरान भारत और चीन के बीच 125.62 अरब डॉलर का कारोबार हुआ था, जो 2020 के मुकाबले 43.32 फीसदी अधिक था। तनाव के बावजूद 2022 में यह और 8.4 फीसदी बढ़ गया। 

इस दौरान चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 31.64 अरब डॉलर बढ़कर 101.02 अरब डॉलर पहुंच गया। 2021 में यह घाटा 69.38 अरब डॉलर रहा था। मई, 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा पर तनाव के बाद से दोनों देशों के बीच कारोबार लगातार बढ़ रहा है। 

सीमा पर तल्खी के बाद भी भारत का चीन के साथ द्विपक्षीय कारोबार नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। 2015 से 2021 के बीच यानी 6 साल में दोनों देशों के बीच कारोबार 75.30 फीसदी बढ़ गया है। इस अवधि के दौरान सालाना औसत वृद्धि 12.55 फीसदी रही।  

बीजिंग में भारतीय दूतावास की वेबसाइट पर जारी बयान के अनुसार, इस सदी की शुरुआत में चीन और भारत के बीच द्विपक्षीय कारोबार नई ऊंचाई पर पहुंच गया। 2008 तक चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बन गया था। पिछले दशक की शुरुआत के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई। 

विश्लेषकों ने कहा, चीन को चुनौती देने के लिए भारत सरकार मेक इन इंडिया से लेकर उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना तक लेकर आई है। इसके बावजूद भारत में सस्ते चीनी उत्पाद की अत्यधिक खपत की वजह से चीन से आयात में कमी नहीं आ रही है।  

अमेरिका एवं यूरोप में कमजोर मांग और कोरोना महामारी की वजह से पाबंदियों के बावजूद 2022 में चीन का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) 877.6 अरब डॉलर था। कस्टम के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल चीन का कुल निर्यात 7 फीसदी बढ़कर 3.95 लाख करोड़ डॉलर पहुंच गया। 

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