बजट में मिल सकती है आयकर में छूट, अंग्रेजों ने लाया था इनकम टैक्स 

मुंबई- बजट में अब एक महीने से भी कम समय रह गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को वित्त वर्ष 2023-24 का आम बजट पेश करेंगी। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का आखिरी फुल बजट है। इसलिए माना जा रहा है कि मिडिल क्लास को खुश करने के लिए सरकार इनकम टैक्स में कुछ ढील दे सकती है। अगले साल देश में आम चुनावों के मद्देनजर इसे अहम बजट माना जा रहा है।  

पिछले नौ साल से इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ था। अभी 2.5 लाख रुपये तक की सालाना इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस लिमिट को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जा सकता है। वैसे एक जमाने में देश में 1,500 रुपये तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगता था। 

देश में आयकर की शुरुआत पहली बार अंग्रेजों के जमाने में हुई थी। साल 1860 में इनकम टैक्स एक्ट आया था। 1857 के गदर से अंग्रेजी सरकार की हालत खस्ता हो गई थी और खजाना भरने के लिए लोगों पर आयकर लगाया गया था। इसके जनक थे जेम्स विलसन। उन्होंने ही साल 1860 में भारत का पहला बजट तैयार किया। इसमें वह इनकम टैक्स ऐक्ट लेकर आए थे। उससे पहले तक देश के लोगों को इनकम टैक्स नहीं देना होता था। इसलिए इसका विरोध हुआ था। 

वैसे देश में इनकम टैक्स स्लैब की शुरुआत आजादी के बाद पहले बजट से ही हो गई थी। स्वतंत्र भारत का पहला बजट देश के पहले वित्त मंत्री आरके षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पेश किया था। वित्त वर्ष 1949–50 के बजट में इनकम टैक्स रेट्स तय किए गए थे। तब 1,500 रुपये तक की सालाना इनकम टैक्स मुक्त रखी गई थी। लेकिन इससे ऊपर की इनकम पर टैक्स लगाने का प्रावधान किया गया था। 

इसमें 1,501 रुपये से 5,000 रुपये तक इनकम टैक्स का रेट 4.69 फीसदी था। इसी तरह 5,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक टैक्स रेट 10.94 फीसदी किया गया था। अगर किसी व्यक्ति की इनकम 10,001 रुपये से 15,000 रुपये थी तो उसे 21.88 फीसदी इनकम टैक्स देना पड़ता था। 15,001 रुपये से अधिक की इनकम पर टैक्स 31.25 फीसदी था। इसके बाद कई बार इनकम टैक्स की दरों में बदलाव हुआ।  

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