एक हजार रुपये का निवेश इस करेंसी में बन गया 76 करोड़ रुपये से ज्यादा

मुंबई- किप्टोकरेंसी का नाम आते ही दिमाग में सबसे पहले बिटकॉइन का नाम आता है। बिटकॉइन दुनिया की सबसे पुरानी, सबसे लोकप्रिय और सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है। क्रिप्टोकरेंसी का पर्याय बन बिटकॉइन आज 14 साल पूरे कर लिए हैं। यूं तो बिटकॉइन के वर्चुअल क्रिएटर सतोशी नाकामोतो ने 28 अक्टूबर, 2008 को इसका व्हाइटपेपर जारी किया था लेकिन उसकी मिंट डेट तीन जनवरी, 2009 थी। यही वजह है कि कई लोग तीन जनवरी को ही बिटकॉइन का बर्थडे मानते हैं।  

अपने 14 साल के सफर में बिटकॉइन ने कई उतारचढ़ाव देखे हैं। दुनिया के कई देशों ने अब भी इसे औपचारिक रूप से मान्यता नहीं दी है लेकिन इससे इसका क्रेज कम नहीं हुआ है। दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसीज और ब्लॉकचेन के उभार में बिटकॉइन की सबसे अहम भूमिका है। नाकामोतो ने 3 जनवरी को बिटकॉइन का ऑरिजिनल ब्लॉक रिलीज किया था जिसे अब जेनेसिस ब्लॉक के नाम से जाना जाता है। 

इसमें पहली 50 बिटकॉइन थीं। इसका पहला ट्रांजैक्शन मई 2009 में हुआ था। इसका मकसद दुनिया में एक ऐसी करेंसी लाना था जिसमें बैंकों और दलालों की कोई भूमिका नहीं होगी। coinmarketcap.com के मुताबिक बिटकॉइन की कीमत अभी 16,748 डॉलर यानी करीब 13,88,266 रुपये है। 

बिटकॉइन के लिए पिछले 14 साल काफी उतारचढ़ाव वाले रहे। इस दौरान इसने कई दोस्त और दुश्मन बनाए। बिटकॉइन के अब तक के रिटर्न को कैलकुलेट करना असंभव है क्योंकि इसकी शुरुआत जीरो के साथ हुई थी। जुलाई 2010 में इसकी कीमत 0.09 डॉलर थी और नवंबर 2021 में यह 68,790 डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंची थी। पिछले 14 साल में भारी भरकम रिटर्न दिया है। यानी शुरुआत में इसमें 1,000 रुपये का निवेश नवंबर 2021 में 76.43 करोड़ रुपये बन गया होता। हाल के वर्षों में बिटकॉइन के निवेशकों में काफी बदलाव आया है। अब रिटेल के बजाय इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स इसमें दांव लगा रहे हैं। 


साल 2009 में जब बिटकॉइन लॉन्च हुई थी तब इसकी कीमत मात्र 0.060 रुपये थी। इसकी कीमत में पहली बार तेजी साल 2010 में आई थी जब इसकी कीमत 0.0008 डॉलर से बढ़कर 0.08 डॉलर पहुंची थी। इसके बाद अप्रैल 2011 में इसकी कीमत एक कडॉलर थी जो जून में बढ़कर 32 डॉलर हो गई।
बिटकॉइन के लिए साल 2013 बेहद निर्णायक रहा। तब दो बार इसकी कीमत में भारी उछाल आई। अप्रैल 2013 में इसका भाव 220 डॉलर पर पहुंच गया। बिटकॉइन की कीमतों में बड़ा उछाल 2017 में आया। जून 2019 में इसका भाव 10 हजार डॉलर के पास था। वहीं, जनवरी 2021 में इसने 40 हजार डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया और फिर उसी साल नवंबर में यह रेकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थी। 

इंस्टीट्यूशनल और रिटेल निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी का ही नतीजा है कि बिटकॉइन का मार्केट कैप एक लाख करोड़ डॉलर के पार पहुंच चुका था। दुनिया के सबसे बड़े रईस एलन मस्क की कंपनी टेस्ला के साथ-साथ Square और MicroStrategy जैसी कंपनियों ने भी बिटकॉइन को सपोर्ट किया है।  

साल 2021 में लैटिन अमेरिकी देश अल साल्वाडोर (El Salvador) बिटकॉइन को कानूनी मान्यता देने वाला पहला देश बना था। वहां गुड्स और टैक्स के पेमेंट में बिटकॉइन का इस्तेमाल किया जा सकता है। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में पहले बिटकॉइन ईटीएफ ने ‘BITO’ के नाम से शुरुआत की गई थी। हालांकि हाल के दिनों में इसमें भारी गिरावट आई है। इसकी वजह यह है कि दुनियाभर की सरकारों खासकर अमेरिका ने इसे हतोत्साहित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। अब इसका मार्केट कैप 318.80 अरब डॉलर रह गया है जो एक साल पहले 874.90 अरब डॉलर था। यानी पिछले एक साल में इसमें 63.5 फीसदी गिरावट आई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *