2022 में डॉलर के लिहाज से सोने के निवेश में निवेशकों को हुआ भारी घाटा 

मुंबई- वर्ष 2022 में, वैश्विक बाजारों में एक के बाद एक अनिश्चित घटनाओं की श्रृंखलाओं के बावजूद सोना निवेशकों के पोर्टफोलियो में चमक पैदा करने में विफल रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की तरफ से ब्याज दरों में लगातार की जा रही बढ़ोतरी और ऊच्‍च महंगाई दर सोने की कीमतों में सुस्ती का प्रमुख कारण रहा है। 

एंजल वन लिमिटेड के नॉन एग्री कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च एवीपी श्री प्रथमेश माल्याने बताया कि इस साल में अब तक (वाईटीडी) में सोने की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि रुपये की कीमत में करीब 11.5 फीसदी की गिरावट की वजह से एमसीएक्स गोल्‍ड की कीमतों में लगभग 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सोने की कीमतों में अस्थिरता हमें एक स्पष्ट कहानी बताती है कि इसमें कई कारक काम करते हैं और परिसंपत्ति वर्ग और विविधीकरण के कारक के रूप में गोल्ड की भूमिका जोखिम में है। 

2021 तक के दशक में, अमेरिका में महंगाई ज्यादातर रूप में केंद्रीय बैंकों के 2% के लक्ष्य से कम थी, जबकि भारत में 4-6% के लक्ष्य से परे महंगाई का अनुभव होता है। परिणामस्वरूप भारत में मुद्रास्फीति औसतन 4% अधिक थी। हालांकि, यह 2022 में पलट गया, क्योंकि अमेरिका में कीमतें बहुत अधिक तेजी से बढ़ीं और बढ़ती मुद्रास्फीति की अस्थिरता के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए 2022 में मौद्रिक नीति को सख्ती के साथ जारी रखे रहना महत्वपूर्ण हो गया।  

डॉलर के संदर्भ में सोने के खराब प्रदर्शन का मूल कारण यह था कि केंद्रीय बैंकों की तरफ से वैश्विक मौद्रिक नीति को सख्त किया गया क्योंकि महंगाई वैश्विक बाजारों के लिए सबसे बड़ी चिंता थी। नीचे दर्शाया गया सूचकांक इस बात की जानकारी देता है कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई का चक्र कैसा रहा है। 

ईटीएफ से निकासी और केंद्रीय बैंकों का गोल्ड के रिजर्व को बढ़ाना: सोने की मांग के कारणों में गहने की मांग, केंद्रीय बैंक की मांग, ईटीएफ, बार और सिक्के और तकनीकी की मांग शामिल है। आइए देखें कि इनमें से प्रत्येक मांग घटक ने पिछले वर्ष में कैसा प्रदर्शन किया है। 

केंद्रीय बैंक हर साल अपने सोने के भंडार में वृद्धि कर रहे हैं और 2022 में भी उन्होंने ऐसा ही किया। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के नवीनतम आंकड़ों में कहा गया है कि वैश्विक केंद्रीय बैंक की खरीदारी 2022 की तीसरी तिमाही में लगभग 400 टन (तिमाही आधार पर 115% अधिक) तक बढ़ गई। यह साल 2000 के बाद से सर्वाधिक मांग वाली तिमाही रही है और 2018 की तीसरी तिमाही के 241 टन के मुकाबले लगभग दोगना है। यह शुद्ध खरीदारी की लगातार आठवीं तिमाही है, जिसकी वजह से एक नवंबर 2022 तक कुल भंडार से किसी एक साल में सर्वाधिक है। 

जहां तक ईटीएफ की बात है, तो नवंबर 2022 के साथ वैश्विक गोल्ड ईटीएफ में लगातार सातवें महीने शुद्ध निकासी दर्ज की गई। नवंबर 2022 तक साल में अब तक (वाईटीडी) वैश्विक ईटीएफ विशेषकर उत्तरी अमेरिकी और एशियाई सूचीबद्ध फंड्स में शुद्ध रूप से 83 टन (2.4 अरब डॉलर) की निकासी हुई है। 

महामारी के कारण दबी हुई मांग के परिणामस्वरूप 2022 की पहली तीन तिमाहियों में आभूषण और बार एवं सिक्के की खरीदारी में स्थिर रूप से वृद्धि हुई है, जिसे 2021 में इसी अवधि की तुलना में उपरोक्त डेटा सेट में देखा जा सकता है। 

इसके अलावा, केंद्रीय बैंक की बढ़ती खरीदारी और 2022 की पहली तीन तिमाहियों में गहनों की मांग में लगातार वृद्धि, ईटीएफ की मांग में गिरावट की आंशिक रूप से भरपाई करती है। कुल मिलाकर, मांग सोने की कीमतों के लिहाज से ठीक नहीं रही हैं और इसने रिटर्न के मोर्चे पर निवेशकों की उम्मीदों को झटका दिया है। इसकी वजह मुख्य रूप से वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में अनिश्चितता की स्थिति है। 

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