भारतीय बैंकों को आगे भारी अनिश्चितता का करना पड़ सकता है सामना 

मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि भारतीय बैंकों को आगे चलकर भारी अनिश्चितता के नजरिये का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, बेहतर बुरे फंसे कर्ज (एनपीए) और ज्यादा पूंजी के बफर के कारण महामारी का बैंकों ने डंटकर सामना किया। आरबीआई ने 2021-22 में भारत में बैंकिंग की प्रवृत्ति और प्रगति पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, सख्त मौद्रिक और तरलता की स्थिति और लाभप्रदता व संपत्ति की गुणवत्ता पर संभावित विपरीत प्रभाव के कारण सावधानी बरती जाती है। 

2022 में वैश्विक विकास के बिगड़ने और 2023 में मंदी की बढ़ती संभावनाओं के साथ प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज वृद्धि घट सकती है। इससे बैंकों की लाभप्रदता कम हो सकती है। दुनिया भर में कठिन उधारी की आशंका बढ़ गई है। आरबीआई ने कहा, उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं के लिए इन कारकों ने पूंजी के बहिर्वाह में वृद्धि, विनिमय दरों में तेज गिरावट और व्यापक आर्थिक संभावनाओं को और ज्यादा गहरा कर दिया है।  

भारतीय बैंकों की बैलेंस शीट में सात साल के अंतराल के बाद 2021-22 में दो अंकों की वृद्धि देखी गई। इस वृद्धि का नेतृत्व कर्ज वृद्धि ने किया। यह वर्ष की पहली छमाही में दस साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों का कुल एनपीए इस साल सितंबर तक 5 फीसदी पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकारी बैंकों के भारी-भरकम कर्ज बट्टे खाते में डाल दिए गए। 

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