सरकारी बैंक बीमा को बेचने के लिए अनैतिक व्यवहार न अपनाएं- मंत्रालय

मुंबई- वित्त मंत्रालय ने सरकारी बैंकों के प्रमुखों को चेतावनी दी है। इसने कहा है कि ग्राहकों को बीमा उत्पादों की बिक्री के लिए अनैतिक व्यवहार न अपनाएं। साथ ही इस पर रोक लगाने के लिए एक मजबूत तंत्र स्थापित करने का निर्देश भी दिया है। लगातार इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं कि ग्राहकों को बीमा उत्पादों की बिक्री के लिए सही जानकारी नहीं दी जाती है। जिसके बाद यह कदम उठाया गया है।  

सरकारी बैंकों के चेयरमैन और प्रबंध निदेशकों को लिखे पत्र में कहा गया है कि वित्तीय सेवा विभाग को शिकायतें मिली हैं कि बैंक और जीवन बीमा कंपनियों द्वारा बैंक ग्राहकों को पॉलिसी की बिक्री के लिए धोखाधड़ी वाले और अनैतिक तरीके अपनाए जा रहे हैं। ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं, जहां दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में 75 वर्ष से अधिक आयु के ग्राहकों को जीवन बीमा पॉलिसी बेची गई हैं।  

आमतौर पर, बैंकों की शाखाएं अपनी सहयोगी बीमा कंपनियों के उत्पादों का प्रचार-प्रसार करती हैं। जब ग्राहकों द्वारा पॉलिसी लेने से इनकार किया जाता है, तो शाखा अधिकारी समझाते हैं कि उन पर ऊपर से दबाव है। जब ग्राहक किसी प्रकार का कर्ज लेने या सावधि जमा (एफडी) खरीदने जाते हैं, तो उन्हें बीमा उत्पाद लेने को कहा जाता है।  

इस संबंध में विभाग ने पहले ही एक सर्कुलर जारी किया है। इसमें यह सलाह दी गई है कि किसी बैंक को किसी विशेष कंपनी से बीमा लेने के लिए ग्राहकों को मजबूर नहीं करना चाहिए। यह भी बताया गया है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने आपत्ति जताई है कि बीमा उत्पादों की बिक्री के लिए प्रोत्साहन से न केवल फील्ड कर्मचारियों पर दबाव पड़ता है, बल्कि बैंकों का मूल कारोबार भी प्रभावित होता है। ऐसे में कर्मचारियों को कमीशन और प्रोत्साहन के लालच की वजह से कर्ज की गुणवत्ता से समझौता हो सकता है।  

पत्र में कहा गया है कि, यह भी सलाह दी जाती है कि बीमा कारोबार की सोर्सिंग करते समय बैंक 100 फीसदी केवाईसी अनुपालन को सुनिश्चित करें। भारतीय बीमा नियामक विकास प्राधिकरण (इरडाई) की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 में गलत बिक्री के मामले 23,110 थे। यानी 10,000 पॉलिसियों पर शिकायतों की संख्या 31 थी।  

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