दरों में और वृद्धि कर सकता है आरबीआई, एमपीसी के ब्योरे में मिला संकेत 

मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) आगे ब्याज दरों में बढ़ोतरी को जारी रख सकता है। मौद्रिक नीति कार्रवाई में समय से पहले रोक एक महंगी नीतिगत गलती होगी। इस महीने आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का ब्योरा बुधवार को जारी किया गया।  

ब्योरे के अनुसार, गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, अनिश्चित दृष्टिकोण को देखते हुए यह एक ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है जहां हम बाद की बैठकों में बढ़ते महंगाई दबावों को दूर करने के लिए मजबूत नीतिगत कार्रवाइयों का प्रयास कर सकते हैं। बढ़ी हुई महंगाई के दबावों को दूर करने के लिए बाद की बैठकों में मजबूत नीतिगत कार्रवाई जरूरी है। एमपीसी ने रेपो दर में 0.35 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। बैठक 5-7 दिसंबर के दौरान हुई थी। गवर्नर ने यह भी कहा कि विशेष रूप से ज्यादा अनिश्चितता के माहौल में मौद्रिक नीति की भविष्य की घोषणा करना सही नहीं होगा। 

ब्योरे के अनुसार, एमपीसी के सदस्य जयंत वर्मा ने दर में 0.35 फीसदी की वृद्धि के खिलाफ मतदान किया था। इसे कम महंगाई के दबावों और बढ़ी हुई विकास चिंताओं के संदर्भ में अनुचित बताया था। मौद्रिक नीति कार्रवाई के प्रभाव को वास्तविक अर्थव्यवस्था में अभी तक महसूस किया जाना बाकी है। इन कारणों से मेरा मानना है कि 6.25% की रेपो दर आर्थिक विकास के लिए जोखिम है। वर्मा ने कहा कि उदार रुख को वापस लेने से विकास के नरम दृष्टिकोण को नुकसान हो सकता है। 

आईडीबीआई बैंक के कार्यकारी निदेशक और ट्रेजरी के प्रमुख अरुण बंसल ने बुधवार को कहा कि आरबीआई अगले साल प्रमुख नीतिगत दर को 6.75% तक ले जा सकता है, क्योंकि मुख्य महंगाई ऊंची बनी हुई है। साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने दरों में वृद्धि जारी रखी है। उन्होंने कहा कि महंगाई के कई घटक अभी चिंताजनक स्तर पर हैं। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि महंगाई आरबीआई के दायरे के भीतर आ गई है। अमेरिकी फेडरल बैंक2023 में दरों को 5% से ऊपर करने के लिए तैयार है, जो आरबीआई को भी पालन करने के लिए मजबूर कर सकता है। 

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