स्टॉक एक्सचेंज से शेयरों की फिर से खरीदी की प्रक्रिया होगी खत्म 

मुंबई- बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने स्टॉक एक्सचेंज के जरिये कंपनियों द्वारा शेयरों की फिर से खरीदी (बायबैक) को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने का फैसला किया है। अब कंपनियां टेंडर ऑफर के जरिये शेयरों की खरीदी कर सकती हैं। इसके साथ ही स्टॉक एक्सचेंजों के गवर्नेंस को बढ़ावा देने के कदमों को भी मंजूरी दी गई है। मंगलवार को सेबी की बोर्ड बैठक में इसे मंजूरी दी गई। केकी मिस्त्री रिपोर्ट की सिफारिश पर यह फैसला लिया गया है। टेंडर के जरिये बायबैक पूरा करने का समय भी घटाकर 18 दिन कर दिया गया है। 

सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने कहा कि नियामक ने शेयर बायबैक के लिए मौजूदा नियम कमजोर है। इसलिए इसे चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा। फिलहाल शेयर बायबैक के लिए कंपनियों के पास स्टॉक एक्सचेंज और टेंडर ऑफर दोनों विकल्प मौजूद हैं। इसके अलावा, सेबी बोर्ड ने कारोबार को सुगम बनाने के लिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) के पंजीकरण में लगने वाले समय को कम करने का फैसला किया है। 

टेंडर रूट के जरिए कंपनी अपने शेयरों को खरीदने के लिए निविदा निकालकर बायबैक के लिए शेयर की एक कीमत तय करती है। बाजार के उतार-चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं पड़ता। यह जरूरी नहीं कि किसी निवेशक ने जितने शेयर के लिए आवेदन किए हो, कंपनी उतने शेयर खरीद ही ले। टेंडर ऑफर के मुकाबले खुले बाजार से शेयर खरीदने में ज्यादा समय लगता है। खुले बाजार से कंपनी बाजार में जो शेयर का भाव चल रहा है, उसके आधार पर ही खरीदारी करती है। दोनों प्रक्रियाओं के बीच जो सबसे बड़ा अंतर है वह यह कि कंपनी टेंडर ऑफर के समय अपना बायबैक रद्द नहीं कर सकती है। जितने समय के लिए बायबैक निकाला होगा, कंपनी को उतने समय में शेयर खरीदने होंगे। लेकिन खुले बाजार में कंपनी बायबैक रद्द कर सकती है। 

सेबी ने म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट स्कीम के लिए केवल एक्जिक्यूशन प्लेटफॉर्म (ईओपी) के साथ-साथ उपयुक्त निवेशक सुरक्षा तंत्र के माध्यम से निवेश करने की घोषणा की। कारोबार को आसान बनाने के लिए इस प्लेटफॉर्म को लाया गया है। इसमें निवेशक सुरक्षा तंत्र, साइबर सुरक्षा जरूरतों, सेवाओं का मूल्य निर्धारण और शिकायत निवारण होगा। 

अनुमोदित ढांचे के तहत ईओपी को दो श्रेणियों में से किसी एक के तहत पंजीकरण दिया जा सकता है। इनमें असेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) के एजेंट के रूप में श्रेणी 1 ईओपी में एंफी में पंजीकृत एजेंट या निवेशक के एजेंट के रूप में श्रेणी 2 ईओपी होगा जो स्टॉक ब्रोकर के रूप में पंजीकृत होंगे।विस्तृत ढांचा और उसके कार्यान्वयन के तौर-तरीके, ईओपी द्वारा दी जाने वाली सेवाओं की प्रकृति को परिपत्रों के माध्यम से अधिसूचित किया जाएगा। 

प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए फाइलिंग के मामले में सेबी कागजात वापस करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। कुछ मर्चेंट बैंकर हैं जो बार-बार अपराध करते हैं। बुच ने कहा, अधूरे कागजातों के मामले में हम कागजात वापस करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। 

रिट और इनविट को सूचीबद्ध कंपनियों पर लागू कॉरपोरेट गवर्नेंस नियमों का पालन करना होगा। इनके ऑडिटर का कार्यकाल कंपनी की 5वीं आम सालाना बैठक (एजीएम) तक होगा। इनके ओवरनाइट फंड में निवेश को कंप्यूट लिवरेज के बराबर नकद माना जाएगा। 

सेबी ने स्टॉक ब्रोकर्स विनियमों में संशोधन को मंजूरी दी। कुछ स्टॉक ब्रोकरों को पहचाने गए मापदंडों के आधार पर योग्य स्टॉक ब्रोकर्स के रूप में नामित करेगा। उन्हें उन्नत जोखिम प्रबंधन प्रथाओं का पालन करना अनिवार्य होगा, वे उन्नत निगरानी के अधीन होंगे। योग्य ब्रोकरों के रूप में वर्गीकृत किए जाने वाले 16 ब्रोकरों का सेट होगा। 

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को भारत में लाने के लिए नियमों को आसान बनाया गया है। प्रपत्रों, आवेदनों आदि की स्कैन की गई प्रतियों को स्वीकार करके एफपीआई को पंजीकरण प्रदान करने में लगने वाला समय कम किया जाएगा। पंजीकरण के लिए स्वीकार किए जाने वाले एफपीआई के डिजिटल हस्ताक्षर स्विफ्ट तंत्र को प्रमाणीकरण के लिए अनुमति दी जाएगी। डिपॉजिटरी को सामान्य आवेदन फॉर्म के माध्यम से पैन को सत्यापित करने की अनुमति दी जाएगी। 

जोखिम सुरक्षा प्लेटफॉर्म-सेबी निवेशकों के लिए एक निवेशक जोखिम सुरक्षा एक्सेस प्लेटफॉर्म स्थापित करेगा, ताकि ब्रोकर संचालन बाधित होने पर ओपन पोजीशन को पूरा किया जा सके। यह प्लेटफॉर्म वित्त वर्ष 2023-24 से उपलब्ध होगा। 

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