गरीबों को मिलने वाले अनाज की बढ़ सकती है समय सीमा, अभी दिसंबर तक है 

मुंबई- कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बीच केंद्र सरकार ने अप्रैल 2020 में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) की शुरुआत की थी। समय-समय पर इस स्कीम की डेडलाइन को बढ़ाया गया है और माना जा रहा है कि सरकार इसे एक और बार बढ़ा सकती है। माना जा रहा है कि दिसंबर के बाद भी प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना को जारी रखा जा सकता है।  

गेंहू के अतिरिक्त स्टॉक के साथ सरकार इस फ्री स्कीम को आगे भी जारी रखने की योजना पर काम कर रही है, हालांकि इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सरकार ने अप्रैल 2020 में 80 करोड़ लोगों के लिए नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज की योजना शुरू की। इस स्कीम के तहत अलग-अलग फेज में सरकार ने 3.9 लाख करोड़ का खर्च किए हैं। माना जा रहा है कि इसे दिसंबर के बाद फिर से बढ़ाकर मार्च 2023 तक जारी रखा जाएगा।  

इस स्कीम के लिए सरकार 40 हजार करोड़ सब्सिडी बिल में जोड़ सकती है। हालांकि सरकार के पास वित्तीय बजट से बड़ी चुनौती गेंहू की जरूरत को पूरा करना है। अगर गेंहू भंडार पर नजर डाले तो सरकार के पास इसका भंडार इतना है कि वो गरीबों के लिए खाद्य सुरक्षा को अगले तीन और महीनों तक जारी रख सकती है।  

सरकार के मुताबिक जनवरी 2023 तक उनके पास करीब 159 लाख टन गेंहू का भंडार होगा। अगर सरकार गरीब कल्याण अन्न योजना को मार्च 2023 तक के लिए बढ़ाती है तो जनवरी से मार्च 2023 के बीच 68 लाख टन अधिक गेंहू की जरूरत पड़ेगी। यानी सरकार के पास 75 लाख टन के बजाए करीब 91 लाख टन गेंहू स्टॉक में होगा। नई फसल के आने तक सरकार के पास अन्न योजना को चलाने के लिए पर्याप्त अनाज है। 

पीएम गरीब कल्‍याण अन्‍न योजना के जरिए सरकार 80 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने 5 किलो मुफ्त अनाज उपलब्ध करवाती है। नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत ये लाभ लोगों को दिया जाता है। इससे पहले भी सरकार कई बार इस स्कीम का विस्तार कर चुकी है। अप्रैल 2022 में शुरू हुई इस स्कीम को मार्च 2022 तक एक्सटेंड किया, फिर इसे बढ़ाकर सितंबर 2022 तक कर दिया गया।  

बाद में इस योजना को दिसंबर 2022 तक के लिए बढ़ा दिया गया। अब एक बार फिर से इसके एक्सटेंशन की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि इसे होली तक बढ़ाया जा सकता है। वहीं जानकार ये भी मानते हैं कि लोकसभा चुनाव 2024 को देखते हुए सरकार इसे 2024 तक जारी रख सकती है। 

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