अब दो करोड़ से कम की टैक्स चोरी पर जीएसटी में नहीं होगा कोई मुकदमा 

मुंबई- वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे को बढ़ाने के लिए सरकार नई रणनीति पर काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य तीन करोड़ करदाताओं का है जो फिलहाल 1.4 करोड़ है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार कोशिश करेंगी। इसकी शुरुआत बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) और प्रॉपर्टी टैक्स में गैर पंजीकृत कारोबारों की पहचान करने के लिए उनके आंकड़ों को साझा करने के पायलट प्रोजेक्ट से हुई है। 

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के प्रमुख विवेक जौहरी ने कहा कि तीन राज्यों में अलग-अलग मामलों के तहत पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसमें मध्य प्रदेश में डिस्कॉम के साथ आंकड़ा साझा करने और गुजरात में पैन-आधारित लिंकेज प्रोजेक्ट चल रहा है। महाराष्ट्र में संपत्ति कर डाटा को साझा करने और कारोबारों को जियो टैग करने व उनकी संपत्ति के साथ जोड़ने पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू है। 

उन्होंने कहा, हम रणनीति पर काम कर रहे हैं। राज्यों के साथ चर्चा कर रहे हैं। जीएसटी का विस्तार करने का मतलब होगा कि हमें उन करदाताओं को देखना होगा जो कर के दायरे में हैं या नहीं। हमारे पास सभी एजेंसियों से मजबूत आंकड़े मिले हैं। विभाग डाटा बेस से यह देखने के लिए मिलान करेगा कि जो लोग कारोबार वाले बिजली कनेक्शन लिए हैं वे कर विभाग के डाटाबेस में हैं या नहीं। इसके आधार पर उनकी पहचान की जाएगी। 

उन्होंने कहा कि यदि कोई ग्राहक प्रॉपर्टी या कारोबार के लिए बिजली लिया है और जीएसटी में पंजीकृत नहीं है तो उसकी आसानी से पहचान की जा सकेगी। 1 जुलाई, 2017 को लॉन्च किए गए जीएसटी में साढ़े पांच साल बाद भी इतने कम संख्या में करदाताओं के होने से विभाग के राजस्व के नुकसान होने की जानकारी मिली है। हालांकि, हर महीने औसतन 1.40 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का जीएसटी मिल रहा है।

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