30 रुपये लेकर निकले थे, पेट और जेब दोनों खाली, आज अरबों का कारोबार 

मुंबई- साल 2012 में दिल्ली की सर्द रातों में एक 17-18 साल का लड़का मस्जिद मोठ रोड के पास चुपचाप बैठा गली को निहार रहा था। पॉकेट में मात्र 30 रुपये थे। पेट और जेब दोनों खाली होने लगा। हिम्मत टूटने लगी। एक बार मन में आया कि घर लौट जाऊं। लेकिन, फिर ख्याल आया कि उस सपने का क्या होगा, जो वो अपने साथ लेकर ओडिशा से दिल्ली तक आया है। दिल्ली की सड़कों पर सिम कार्ड बेचने वाला वो लड़का आज दुनिया के सबसे यंग बिलेनियर की लिस्ट में शामिल हो गया।  

दुनिया में 80 देशों के 800 शहरों में इनके कारोबार का विस्तार हैं। ओयो रूम्स के फाउंडर रितेश अग्रवाल इसी कारोबार के मालिक हैं। 

ओयो रूम्स वाले रितेश अग्रवाल इन दिनों फिर से चर्चा में हैं। रितेश अपनी कंपनी से निकाले गए कर्मचारियों के लिए नौकरी मांग रहे हैं। अपने लिंकडइन पेज पर उन्होंने पोस्ट लिखकर ओयो से निकाले गए कर्मचारियों के लिए नौकरी मांगी। इससे पहले भी उनकी चर्चा तब हुई थी, जब उनकी सैलरी 1.6 करोड़ से सीधे 5.6 करोड़ रुपये हो गई थी। एक ओर जहां उनकी सैलरी बढ़ी, वहीं कंपनी के कर्मचारियों की सैलरी में भारी कटौती की गई।  

कर्मचारियों की छंटनी के बाद उनके लिए नौकरी मांग रहे सीईओ के इस कदम की लोग खूब तारीफ कर रहे हैं। रितेश अग्रवाल दुनिया के दूसरे सबसे युवा सेल्फ मेड बिलेनियर हैं, लेकिन इतनी आसानी से उन्हें ये मुकाम नहीं मिला है।  

रितेश का जन्म 1993 में ओडिशा के मारवाड़ी परिवार में हुआ। मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे रितेश के परिवार वाले चाहते थे कि वो पढ़-लिखकर इंजीनियर बनें, इसलिए उन्हें पढ़ने के लिए कोटा भेजा। रितेश 10वीं पास कर कोटा तो चले गए, लेकिन उनका मन वहां नहीं लगा और वो दिल्ली पहुंच गए। रितेश जानते थे कि वो नौकरी के लिए बल्कि बिजनेस के लिए बने हैं। 

दिल्ली में रहना आसान नहीं था। खुद के खर्च के लिए पैसे नहीं थे तो कारोबार के बारे में कहां से सोचते। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और रास्ते पर घूम-घूम कर सिम कार्ड बेचना शुरू कर दिया। यहीं से उनके कारोबारी बनने का सफर शुरू हो गया। साल 2013 में रितेश को थिएल फेलोशिप के लिए चुना गया, जिससे उन्हें करीब 75 लाख रुपए मिलने थे। उन्होंने इन्हीं पैसों से ओयो रूम्स की शुरूआत कर दी। इससे पहले उन्होंने लंबा रिसर्च किया। अपनी कंपनी का नाम उन्होंने ओरोवर स्टे रखा। इस प्लेटफॉर्म की मदद से वो किफायती दरों पर, आसानी से होटल बुकिंग की सुविधा उपलब्ध करवाते थे। 

​ रितेश ने अपना स्टार्टअप तो शुरू कर दिया, लेकिन वो सफलता नहीं मिल रही थी। वो समझ गए कि इस नाम के साथ लोग खुद को कनेक्ट नहीं कर पा रहे हैं। इसलिए उन्होंने अपनी कंपनी का नाम बदलकर ओयो रूम्स कर दिया। साल 2013 में शुरू हुई इस कंपनी ने महज 8 साल में बंपर सफलता हासिल की और 75 हजार करोड़ की कंपनी बन गई। ओयो का कारोबार 80 देशों के 800 शहरों तक फैल चुका है। ये कंपनी किफायती दरों पर स्टैंडर्ड रूम्स और कपल फ्रेंडली ऑप्शन अपने कस्टमर्स को देती है। इसी वजह से ये लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। दूर-दराज के इलाकों में भी इस कंपनी का नेटवर्क फैला है। 

रितेश अग्रवाल ने ओयो रूम्स की सफलता के साथ हमेशा आगे की ओर देखा और कभी पीछे नहीं मुड़ें। भारत के अरबपतियों की लिस्ट में वो शामिल हैं। मात्र 24 साल की उम्र में रितेश दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हो गए। साल 2020 में रितेश अग्रवाल को हुरुच रिच की लिस्ट में शामिल किया गया। रितेश की कुल संपत्ति 1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गई। रितेश जल्द ही अपनी कंपनी का आईपीओ लाने वाले है। ओयो होटल्स के आईपीओ को 2023 की शुरुआत में लाने की तैयारी की जा रही है। कंपनी ने सेबी के पास नए फाइनेंशियल पेपर जमा करवा दिए हैं। 

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