बिजली की कमी से निपटने के लिए प्राकृतिक गैस आयात बढ़ाने का आदेश 

मुंबई- सरकार ने गर्मियों में बिजली की ज्यादा मांग से निपटने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है। इसने सरकारी कंपनियों से कहा है कि वे प्राकृतिक गैस के आयात को बढ़ाना शुरू कर दें। सूत्रों ने कहा, पिछले साल की तरह इस साल भी अप्रैल में बिजली संकट हो सकता है। सीमित स्थानीय उपलब्धता और उच्च वैश्विक कीमतों के कारण भारत के बिजली उत्पादन में प्राकृतिक गैस की हिस्सेदारी इस साल सिर्फ 1.5% थी। 2019 में यह 3.3% थी। अधिकारियों का कहना है कि विशेष रूप से जब गर्मी अपने चरम पर होती है तब एसी का उपयोग बढ़ जाता है। इससे बिजली की खपत भी बढ़ जाती है। 

इस साल अप्रैल में अभूतपूर्व बिजली का उपयोग किया गया। उस समय बिजली की मांग 7% से अधिक हो गई थी जो अनुमान से ज्यादा था। इससे बड़े पैमाने पर बिजली की कटौती हुई। मार्च के मध्य के आसपास अधिकांश हिस्सों में तापमान आमतौर पर बढ़ना शुरू हो जाता है और जून की शुरुआत तक ऊंचा बना रहता है। 

भारत सरकार ने देश के सबसे बड़े गैस वितरक गेल से गर्मी के महीनों के दौरान बिजली संयंत्रों को आपूर्ति बढ़ाने के लिए कहा है। भारत के सबसे बड़े बिजली उत्पादक एनटीपीसी को भी 2 गीगावाट गैस से चलने वाले बिजली संयंत्रों को तैयार रखने के लिए कहा गया है। बिजली की भारी मांग को पूरा करने के लिए गैस-आधारित क्षमता का उपयोग करने पर कई बैठकें हुई हैं। सरकार और राज्य द्वारा संचालित कंपनियों के अधिकारी इसमें शामिल थे। 

आने वाले समय में सरकार निजी गैस आधारित बिजली उत्पादकों के साथ भी बैठक कर सकती है। भारत के बिजली उत्पादन में कोयले का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा है। स्थानीय उत्पादन और आपूर्ति में रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद भारत घरेलू कोयले के साथ मिश्रण करने के लिए कोयले का आयात जारी रखेगा। सरकार ने अभी तक यह अनुमान नहीं लगाया है कि कितनी अतिरिक्त प्राकृतिक गैस का आयात करने की आवश्यकता होगी। लेकिन बढ़ी हुई खरीद कीमतों को बढ़ा सकती है और पड़ोसी पाकिस्तान और बांग्लादेश को नुकसान पहुंचा सकती है, जो भारी कर्ज से जूझ रहे हैं और आयातित गैस पर बहुत अधिक निर्भर हैं। 

वैश्विक गैस बाजार में अगले साल महंगाई रहने की उम्मीद है क्योंकि रूसी पाइपलाइन गैस की आपूर्ति कम हो रही है। बांग्लादेश और पाकिस्तान ने रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद अंतरराष्ट्रीय गैस की कीमतों में वृद्धि के बीच गैस की खरीद में कटौती की है। केंद्रीय मंत्री आर के सिंह ने बुधवार को कहा, अप्रैल 2023 में बिजली की एक दिन की पीक डिमांड 35,000 मेगावाट तक बढ़ने की उम्मीद है। सरकार ने उसी को पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है। अगले साल अप्रैल में संभावित मांग की तैयारी की समीक्षा के लिए उन्होंने बैठक की है। अप्रैल 2022 में दोपहर 2:51 बजे बिजली की अधिकतम मांग 201.066 गीगावाट थी। अभी दैनिक आधार पर मांग पिछले साल के इसी दिन की तुलना में 20,000 मेगावाट से 25,000 मेगावाट अधिक है। 

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