2025 तक देश में 90 लाख से 1.10 करोड़ जुड़ेंगे दिहाड़ी मजदूर, बढ़ेगा रोज़गार 

मुंबई- अधिक से अधिक कंपनियां परियोजना के आधार पर कर्मचारियों को नियुक्त करने को प्राथमिकता दे रही हैं। एक रिपोर्ट से पता चला है कि 2025 तक देश में 90 लाख से 1.10 करोड़ अतिरिक्त लोग दिडाड़ी कामगार (गिग वर्कर) के रूप में कंपनियों से जुड़ेंगे। गिग इकॉनमी लंबे समय में सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक बदलावों में से एक रही है। ज्यादातर लोग गिग रोजगार चुन रहे हैं क्योंकि यह उनकी जीवनशैली के साथ संतुलन बिठाती है। वे यह चुन सकते हैं कि उनको कब और कितना काम करना है। गिग कामगार एक साथ कई जगह काम कर सकते हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने गिग वर्क प्लेटफॉर्म और प्रक्रियाओं में भी निवेश करना शुरू कर दिया है। यह दर्शाता है कि वे भारत में नौकरियों के विकास के भविष्य के लिए तैयारी कर रही हैं। सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश नियोक्ता (58 फीसदी) का अनुमान है कि गिग कामगारों की संख्या ज्यादा तेजी से बढ़ेगी। इनडीड इंडिया के बिक्री प्रमुख शशि कुमार ने कहा, डिलीवरी और घरेलू सेवाओं जैसी भूमिकाओं के लिए ऐप-आधारित मॉडल उभर रहे हैं। आने वाले वर्षों में हम इस सेगमेंट में तेजी से वृद्धि की उम्मीद करते हैं। 

यह रिपोर्ट व्यक्तिगत देखभाल सेवाओं, सफाई सेवाओं, घरेलू या वाहन की मरम्मत, भोजन और अन्य डिलीवरी, और कैब या दोपहिया-ड्राइविंग, मानव संसाधन परामर्श, खुदरा आदि पर आधारित है। इसमें गिग ऐप कंपनियों के 550 नियोक्ताओं और 750 गिग कर्मचारियों के बीच सर्वेक्षण किया गया है।रिपोर्ट में पता चला है कि डोर डिलीवरी जैसी नौकरी की भूमिकाएं सबसे प्रचलित हैं। कंपनियां इसके लिए ही भर्तियां कर रही हैं। 

सर्वेक्षण में शामिल 22 फीसदी नियोक्ता भोजन के लिए और 26 फीसदी अन्य डिलीवरी के लिए ऐसे कामगारों को काम पर रख रहे हैं। सर्वेक्षण किए गए लगभग 16 फीसदी नियोक्ता घरेलू या वाहन की मरम्मत और रखरखाव के लिए और कैब या दोपहिया वाहन चलाने के लिए गिग कामगारों को काम पर रख रहे हैं। 10 फीसदी सफाई के लिए और 7 फीसदी व्यक्तिगत देखभाल सेवा भूमिकाओं के लिए काम पर रख रहे हैं। 

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि नौकरी की जानकारी तक पहुंच की कमी (62 फीसदी), अंग्रेजी नहीं जानना (32 फीसदी) और स्थानीय भाषा नहीं जानना (10 फीसदी) गिग श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी बाधाएं हैं। 

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