विदेशी निवेशक समूह 51 फीसदी खरीद कर बन सकते हैं आईडीबीआई के मालिक 

मुंबई- आईडीबीआई बैंक में अब विदेशी निवेशक भी मालिक हो सकते हैं। मंगलवार को सरकार ने कहा, बैंक में विदेशी निवेशकों के समूह को 51 फीसदी हिस्सेदारी लेने को वह मंजूरी देगी। सरकार ने एक स्पष्टीकरण जारी किया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मौजूदा दिशानिर्देश नए निजी बैंकों में विदेशी मालिकाना हक को प्रतिबंधित करते हैं। प्रमोटरों के लिए केंद्रीय बैंक का रेजीडेंसी मानदंड केवल नए बैंकों के लिए लागू होता है और आईडीबीआई बैंक जैसे मौजूदा संस्थान पर यह लागू नहीं होगा। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने इच्छुक बोलीदाताओं के सवालों के जवाब में यह बात कही। 

दीपम ने कहा, रेजीडेंसी मानदंड भारत के बाहर से निवेश करने वाले संघ पर लागू नहीं होगा। अगर किसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी का आईडीबीआई बैंक में विलय हो जाता है, तो सरकार और आरबीआई शेयरों के लिए पांच साल की लॉक-इन अवधि में ढील देने पर भी विचार करेंगे। यह स्पष्टीकरण आईडीबीआई बैंक में बहुमत हिस्सेदारी के लिए अभिव्यक्ति जमा करने की 16 दिसंबर की समय सीमा से पहले आया है। 

सरकार और एलआईसी की संयुक्त रूप से बैंक में 94.71% हिस्सेदारी है। दोनों मिलकर 60.72% बेचने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, आईडीबीआई बैंक पहले सरकारी था, लेकिन भारी-भरकम कर्ज में फंसने के कारण बैंक में एलआईसी ने 49.24 फीसदी हिस्सेदारी ले ली। इससे यह निजी क्षेत्र का बैंक बन गया। सरकार की हिस्सेदारी 45.48 फीसदी है। जनता के पास 5.28 फीसदी हिस्सा है। 

निजीकरण की खबरों से एक साल में बैंक का शेयर दोगुना बढ़ गया। पिछले साल दिसंबर में यह 30 रुपये पर था जो मंगलवार को 59 रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि, बंद होते समय यह 8 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 58.60 रुपये पर बंद हुआ। एलआईसी को उम्मीद है कि शेयरों की कीमतों में तेजी से वह अपना 21,624 करोड़ रुपये के निवेश को निकाल लेगी। उसने 21, जनवरी, 2019 को आईडीबीआई में हिस्सेदारी ली थी। 

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