लोन और एफडी के लिए अभी भी सही समय, जानिए कैसे होगा आपका फायदा 

मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) एक बार फिर से रेपो दर को बढ़ाने की घोषणा कर सकता है। ऐसे में जहां कर्ज महंगा होगा, वहीं फिक्स्ड डिपॉजिट पर भी ब्याज बढ़ जाएगा। यह उन दोनों लोगों के लिए अभी सही समय है, जो लोन लेना चाहते हैं या फिर एफडी कराना चाहते हैं।  

लोन की दरें अब इसके बाद बढ़नी मुश्किल है या फिर बहुत कम बढ़ेंगी। जबकि एफडी की भी दरें इस बार बढ़ने के बाद स्थिर हो सकती हैं या आगे चलकर थोड़ी बहुत इसमें वृद्धि हो सकती है। दरअसल, बैंकों के कर्ज की वृद्धि अब सालाना स्तर पर 17 फीसदी के करीब हो गई है। शुक्रवार को आए रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 18 नवंबर को समाप्त हफ्ते में बैंकों की कुल उधारी 133.29 लाख करोड़ रुपये रही है जो कि एक साल पहले यह 113.96 लाख करोड़ रुपये थी। इसी समय में जमा की वृद्धि दर केवल 9.30 फीसदी रही है जो कि 177.15 लाख करोड़ रुपये रही। एक साल पहले यह 162 लाख करोड़ थी।  

यानी सीधे-सीधे बैंकों को अगर 17 फीसदी की उधारी की वृद्धि दर बनाए रखनी है तो उनको जमा पर ब्याज दर बढ़ाना ही होगा। क्योंकि जमा की तुलना में कर्ज की मांग दोगुना के करीब है। 

सोमवार से इसकी शुरू होने वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक 7 दिसंबर को खत्म होगी। ऐसे में उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक रेपो दर में इस बार 0.25 से 0.35 फीसदी की बढ़त कर सकता है। इस साल मई से लेकर अब तक चार बार में 1.90 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। उसकी तुलना में इस बार कम ब्याज दर बढ़ने की उम्मीद है। ऐसा इसलिए क्योंकि आरबीआई की उम्मीद के मुताबिक अक्तूबर महीने में खुदरा और थोक महंगाई कम हुई है।  

खुदरा महंगाई अब 7 फीसदी से नीचे आ गई है। हालांकि, यह अभी भी आरबीआई के तय दायरे 2 से 6 फीसदी से मामूली ऊपर है। पर सरकार और केंद्रीय बैंक के लगातार प्रयासों के कारण इसके 6 फीसदी के नीचे आने की जल्द गुंजाइश है। 

पिछली चार बार में रेपो दर में 1.90 फीसदी की वृद्धि के बाद एफडी की दरें भी ऊपर चली गई हैं। छोटे बैंक इस समय 8 से 8.50 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं। हालांकि निवेशक चाहें तो कुछ एनसीडी में दांव लगा सकते हैं जहां अभी पांच साल के निवेश पर सालाना 10 फीसदी से ऊपर ब्याज मिल रहा है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुख्य अर्थशास्त्री सुवोदीप रक्षित कहते हैं कि आरबीआई रेपो दर में 0.35 फीसदी की बढ़त कर सकता है।  

हालांकि, निर्णय सर्वसम्मति से होने की संभावना नहीं है। घरेलू मांग स्थिर बनी हुई है। वैश्विक मांग में कमी का जोखिम बढ़ रहा है। इससे जिससे भारत के विकास पर असर पड़ने की संभावना है। बाहरी क्षेत्र की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाओं में महंगाई ज्यादा बनी हुई है। कमोडिटी की कीमतों में भी कमी आई है। कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट भी उत्साहजनक है। हालांकि यह अनिश्चित है कि यह बनी रहेगी या नहीं। ये कारक आरबीआई को दर वृद्धि की गति को धीमा करने में कुछ विश्वास प्रदान करेंगे। 

वैसे बड़े और प्रतिष्ठित बैंकों की एफडी की दर भले कम होती है, लेकिन यहां पर सुरक्षा और तरलता ज्यादा होती है। साथ ही गारंटी रिटर्न होता है। इसलिए यह सभी ग्राहकों के लिए अच्छा होता है। वे अपने प्रोफाइल के आधार पर इसमें निवेश कर सकते हैं। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह एक बेहतर विकल्प है। चूंकि यहां पर गारंटी रिटर्न है इसलिए आपातकाल में मेडिकल की जरूरतों या फिर कहीं अचानक जाने के खर्च की जरूरतों को यह पूरा करने में अच्छा होता है। 

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