बकाया कर के मुकाबले रिफंड को समायोजित करने की अवधि घटकर 21 दिन  

मुंबई- आयकर विभाग ने बकाया कर के मुकाबले रिफंड को समायोजित (एडजस्ट) करने के सिलसिले में करदाताओं को राहत दी है। कर अधिकारियों को इस तरह के मामलों में अब 21 दिन में निर्णय करना होगा। पहले यह अवधि 30 दिन की थी। इस फैसले से मुकदमेबाजी में कमी आएगी।  

आयकर विभाग की ओर से जारी बयान के अनुसार, यदि करदाता एडजस्टमेंट के लिए सहमत नहीं है या आंशिक रूप से सहमत है, तो मामले को सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीसी) द्वारा तुरंत असेसिंग अधिकारी को भेजा जाएगा। अधिकारी 21 दिन के भीतर सीपीसी को अपनी राय देंगे कि एडजस्टमेंट किया जा सकता है या नहीं। 

आयकर अधिनियम की धारा 245 के तहत असेसिंग अधिकारी, करदाता की ओर से बकाया किसी भी कर मांग के खिलाफ रिफंड को समायोजित कर सकता है। यदि करदाता कर मांग से असहमत हैं तो वे इंटीमेशन नोटिस का जवाब दे सकते हैं। आयकर निदेशालय का कहना है कि असेसिंग अधिकारी को वैसे तो अभी 30 दिनों के भीतर प्रतिक्रिया प्रदान करने होती है। लेकिन कई मामलों में प्रतिक्रिया समय पर प्रदान नहीं की जाती है। इससे रिफंड जारी करने में देरी होती है। इससे शिकायतें और मुकदमेबाजी होती है। रिफंड जारी करने में इस तरह की देरी से ब्याज का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। 

रिफंड के एडजस्टमेंट से जुड़े कई मामलों में सीपीसी ने पाया कि मांग का गलत वर्गीकरण या असेसिंग अधिकारी की प्रतिक्रिया न मिलने के चलते रिफंड का गलत एडजस्टमेंट हुआ। ऐसे में अनावश्यक मुकदमेबाजी हुई। ताजा निर्देश के बाद करदाताओं के सामने आने वाली कठिनाइयों का तेजी से समाधान होगा। यह निर्देश असेसिंग अधिकारी के इस दायित्व को भी दोहराता है कि विभिन्न प्राधिकरणों द्वारा दिए गए स्टे और ली गई किस्तों के आधार पर सही मांग की स्थिति को अपडेट किया जा सकेगा। 

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