18 साल बाद टाटा का आईपीओ, गोपनीय प्री फाइलिंग का विकल्प चुनने वाली पहली कंपनी 

मुंबई- टाटा प्ले ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए दस्तावेजों की गोपनीय प्री-फाइलिंग का विकल्प चुना है। इस विकल्प का उपयोग करने वाली देश की पहली कंपनी बन गई है। साथ ही टाटा समूह की किसी कंपनी का 18 साल बाद आईपीओ आ रहा है। इस समूह का अंतिम आईपीओ टीसीएस का 2004 में आया था। इस कदम के तहत कंपनी के आईपीओ पेपर्स तब तक पब्लिक स्क्रूटनी के लिए उपलब्ध नहीं होंगे, जब तक कि वह आईपीओ को लॉन्च करने को लेकर फैसला नहीं कर लेती। 

टाटा प्ले का पुराना नाम टाटा स्काई था। टाटा प्ले ने 29 नवंबर को सेबी, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के समक्ष दस्तावेज दायर किए। इस कंपनी में टाटा सन्स की 62% हिस्सेदारी है। टाटा प्ले 2,000-2,500 करोड़ रुपये जुटाने की सोच रही है। टाटा प्ले में सिंगापुर की टेमासेक होल्डिंग्स, टाटा अपॉर्च्युनिटीज फंड और वॉल्ट डिज्नी मौजूदा निवेशक हैं। इनकी कंपनी में बाकी 37.8 फीसदी हिस्सेदारी है। यह भी खबर है कि टेमासेक होल्डिंग्स और टाटा अपॉर्च्युनिटीज फंड पूरी तरह से कंपनी से निकल सकते हैं। 20 फीसदी हिस्सा रखने वाली वॉल्ट डिज्नी कुछ शेयर बरकरार रख सकती है। 

आईपीओ की प्री-फाइलिंग के लिए कंपनियों को सार्वजनिक तौर पर घोषणा करनी होती है कि उन्होंने सेबी और एक्सचेंजेस के पास ऑफर डॉक्युमेंट्स प्री-फाइल कर दिए हैं। कंपनी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि प्री-फाइलिंग का मतलब यह नहीं है कि वह आईपीओ लाएगी। फाइलिंग के बारे में कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं होती है, इसलिए कोई सवाल नहीं पूछा जाएगा। कोई तारीख तय करने की जल्दी नहीं होगी। आईपीओ के लिए गोपनीय प्री-फाइलिंग का रिवाज अमेरिका में लोकप्रिय है। टाटा प्ले ने पांच निवेश बैंकर को चुना है। 

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