अब एफडी के एवज में लोग ले रहे हैं बैंकों से लोन, तेजी से बढ़ी रफ्तार 

मुंबई- कोरोना के बाद पर्सनल लोन की रफ्तार में भारी तेजी आई है। बैंकों के 129 लाख करोड़ रुपये के कर्ज में पर्सनल लोन की हिस्सेदारी 31.4 फीसदी है। इसमें भी दिलचस्प यह है कि लोगों ने एफडी के एवज में ज्यादा लोन लिया है। जबकि क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेने में 43 फीसदी की वृद्धि आई है।  

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, अक्तूबर, 2021 में कृषि लोन की वृद्धि दर 10.8 फीसदी थी जो इस साल अक्तूबर में 13.6 फीसदी हो रही है। इंडस्ट्री की वृद्धि 3.3 से बढ़कर 13.6 फीसदी रही है। सेवाओं को दिए जाने वाले कर्ज में इस साल 22.5 फीसदी की वृद्धि रही जो एक साल पहले केवल 2.8 फीसदी थी। पर्सनल लोन की वृद्धि दर 12.6 फीसदी से बढ़कर 20.2 फीसदी हो गई है। 

इंडस्ट्री में मध्यम कंपनियों के कर्ज में वृद्धि 31 फीसदी से बढ़कर 35 फीसदी हो गई है। बड़ी कंपनियों की वृद्धि दर 0.4 फीसदी से बढ़कर 10.9 फीसदी रही। सूक्ष्म एवं छोटी कंपनियों का कर्ज 20.4 फीसदी बढ़ा है जो एक साल पहले 14.6 फीसदी था। सेवा क्षेत्र में सबसे ज्यादा बढ़त एनबीएफसी की रही है। पिछले साल इसमें केवल 1.4 फीसदी की बढ़त थी जो अब 38 फीसदी है। रियल एस्टेट के कर्ज में 10.1 फीसदी की बढ़त आई है जो पिछले साल 2.2 फीसदी की गिरावट में था। 

आंकड़े बताते हैं कि अक्तूबर, 2021 में कंज्यूमर ड्यूरेबल का लोन 54.1 फीसदी की दर से बढ़ा था, जो इस साल अक्तूबर में 57.1 फीसदी की दर से बढ़ा है। इसी दौरान हाउसिंग में 12.3 फीसदी की जगह 16.2 फीसदी की वृद्ध रही है। एफजी के एवज में लोन पिछले साल महज 7.5 फीसदी बढ़ा था जबकि इस साल यह 43.4 फीसदी की दर से बढ़ा है। क्रेडिट कार्ड से लोन में इस साल 28.4 फीसदी की वृद्ध आई है जो कि पिछले साल 13.2 फीसदी रही थी।  

आंकड़ों के अनुसार, अक्तूबर तक बैंकों के कर्ज में 17.9 फीसदी की तेजी सालाना आधार पर आई थी। एक साल पहले यह 6.8 फीसदी थी। कुल कर्ज 128.89 लाख करोड़ रुपये रहा। कुल लोन में विनिर्माण का 27.4 फीसदी और सेवाओं का हिस्सा 27.6 फीसदी है। कृषि का हिस्सा 13.2 फीसदी है। इंडस्ट्री कर्ज में बड़ी कंपनियों की हिस्सेदारी 76.5 फीसदी है। पर्सनल सेगमेंट में सबसे ज्यादा हिस्सा हाउसिंग का है जो 49 फीसदी है। व्यावसायिक रियल एस्टेट का 9.2 फीसदी है। 12 फीसदी हिस्सा वाहनों का है। 

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस कहते हैं कि यदि परिवार कम मूल्य की की वस्तुओं की खरीद के लिए कर्ज का उपयोग कर रहे हैं या सोने के गहने या एफडी के एवज में कर्ज ले रहे हैं तो यह खपत की बदलती संस्कृति का संकेत है। यह एक पीढ़ी के बदलाव के कारण भी हो सकता है, जिसमें मिलेनियल्स खपत को पूरा करने के लिए क्रेडिट के विभिन्न तरीकों का उपयोग तेजी से कर रहे हैं। 

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