पूरी दुनिया की तुलना में भारत में कम महंगाई, खाना-पीना और रहना सस्ता 

मुंबई- केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में तेज वृद्धि और कमोडिटी की कीमतों में आसमान छूती महंगाई से पूरी दुनिया भले ही परेशान हो, पर भारत में इसका कम असर हो रहा है। एसबीआई की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दर्जनों मुख्य देशों की तुलना में भारत में महंगाई अभी भी बहुत कम है।  

रिपोर्ट कहती है कि सितंबर, 2021 से सितंबर, 2022 के दौरान अमेरिका में खुदरा महंगाई 22.5 डॉलर बढ़ी जबकि भारत में यह 12.1 रुपये बढ़ी। यूके में 11.4 पाउंड और जर्मनी में 11 यूरो की तेजी आई। इसी तरह से रहने के लिए तब 100 रुपये खर्च होते थे तो अब यह अमेरिका में 21 रुपये, यूके में 30 रुपये, जर्मनी में 21 रुपये और भारत में केवल 6 रुपये बढ़ी। ऊर्जा के मामले में यह 100 रुपये अमेरिका में 12 रुपये, यूके में 93 रुपये, जर्मनी में 62 और भारत में केवल 16 रुपये ही बढ़ा। आंकड़े बताते हैं कि 2014 से 2022 के दौरान भारत में प्रति व्यक्ति आय 57 फीसदी बढ़ी है। जबकि दूसरे देशों में इसमें कमी आई है। 

विभिन्न देशों में कीमतों को उनकी मुद्रा के बजाय रुपये में परिवर्तित करके कीमतें निकाली गई हैं। सितंबर 2021 में घरेलू बजट या जीवन यापन की लागत यदि सभी देशों में 100 रुपये थी, तो अमेरिका और भारत में इसमें 12-12 रुपये की वृद्धि हुई। जबकि इसी दौरान जर्मनी में 20 रुपये और यूके में 23 रुपये महंगाई बढ़ गई। खाद्य कीमतों की बात करें तो इसी दौरान यह 100 रुपये पर अमेरिका में 25 रुपये बढ़ी तो यूके में 18 रुपये, जर्मनाी में 33 रुपये और भारत में केवल 15 रुपये ही बढ़ी। 

स्पष्ट रूप से, वैश्विक उथल-पुथल के बाद रहने की लागत में गिरावट आई है, लेकिन भारत अभी भी उन देशों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन करता है, जिन्हें ठोस मैक्रो प्रबंधन का प्रतीक माना जाता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं के माध्यम से तबाह हो रही है। भारत ने अन्य देशों की तुलना में रहने की लागत का प्रबंधन करने में काफी अच्छा किया है। 

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने हाल ही में बताया है, खाद्य और ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं। पूरे देश में रहने की लागत में कई गुना वृद्धि हुई है। ब्याज दरों की तेजी वृद्धि से एक घर के मालिक होने की लागत भी कई गुना बढ़ गई है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि अनिश्चितता के इस दौर में भारत में अन्य देशों की तुलना में काफी कम महंगाई बढ़ी है। 

आईएमएफ की की रिपोर्ट कहती है कि खाद्य और ऊर्जा की कीमतें 2004 के बाद 75% समय तक एक ही चरण में रही हैं। इस तरह की महंगाई दुनिया भर में अधिकांश विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से निम्न-आय समूहों पर गंभीर प्रभाव डालती है। इन देशों में भोजन एक महत्वपूर्ण घरेलू खर्च है। इसका इन देशों में रहने की लागत पर सीधा प्रभाव पड़ता है। यूक्रेन-रूस संघर्ष की शुरुआत के बाद से विकसित और साथ ही उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 

इसी तरह प्रति व्यक्ति आय में 2014 से अब तक भारत में लोगों की आय 57 फीसदी बढ़ी है। जबकि यूके में यह एक फीसदी और फ्रांस में 5 फीसदी गिरी है। रूस में 5 फीसदी बढ़ी है जबकि इटली में 6 फीसदी घट गई है। ब्राजील में 27 फीसदी की गिरावट और जापान में 11 फीसदी लोगों की आय घट गई है। जर्मनी में एक फीसदी की तेजी और चीन में 88 फीसदी की बढ़त इसी दौरान दर्ज की गई है। अमेरिकी में लोगों की आय 36 फीसदी बढ़ी है।  

अमेरिकी नौकरी बाजार अभी भी काफी मजबूत है और श्रम बाजार पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए फेड को कुछ और दरों में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। वित्त वर्ष 2023 में 29 जुलाई तक भारत से 14.7 अरब डॉलर की पूंजी निकालने के बाद नवंबर में फिर से विदेशी निवेशकों ने 45 हजार करो़ड़ का निवेश किया। 

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