भारत में डेटा केंद्रों को दो साल में मिला 10 अरब डॉलर का निवेश 

मुंबई- देश के डेटा केंद्रों को 2020 से अब तक 10 अरब डॉलर (लगभग 81,247 करोड़ रुपये) का निवेश प्राप्त हुआ है। कोलियर्स इंडिया के अनुसार, तेज वृद्धि के बीच ऐसी सुविधाओं की मांग बढ़ी है। भारत का डेटा सेंटर स्टॉक 2025 तक वर्तमान क्षमता 10.3 मिलियन वर्ग फुट से दोगुना होकर लगभग 20 मिलियन वर्ग फुट होने की संभावना है। वर्तमान में शीर्ष सात शहरों – मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बंगलूरु, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे और कोलकाता में लगभग 770 मेगावाट डेटा सेंटर क्षमता है। 

पिछले दो वर्षों में डिजिटलीकरण के माध्यम से डेटा खपत में भारी वृद्धि क्लाउड अपनाने आदि के कारण हुई है। इसी समय डेटा सेंटर संचालक रियायती भूमि, स्टाम्प जैसे प्रोत्साहनों से उत्साहित हैं। इसके लिए कई राज्यों द्वारा शुल्क में छूट आदि प्रदान की जाती है। मुंबई में डेटा केंद्रों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी 49 फीसदी है। दिल्ली-एनसीआर में कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 17 फीसदी है। 

निवेश वैश्विक डेटा सेंटर ऑपरेटरों से मिला है जो भारत में विस्तार करना चाहते हैं। इसमें कहा गया है कि बढ़ती डेटा खपत और अनुकूल सरकारी नीतियों के कारण पिछले 2-3 वर्षों में इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिला है। मेट्रो शहर डेटा केंद्रों के लिए मुख्य केंद्र बने हुए हैं। टियर-2 शहरों में भी आकर्षण देखा जा रहा है। वर्तमान में टियर-2 शहरों के पास भारत में कुल डेटा सेंटर स्टॉक का केवल 3 फीसदी हिस्सा है। 

हालांकि, प्रमुख डेटा सेंटर संचालक विजयवाड़ा, नागपुर, रायपुर, कोच्चि, पटना और मैंगलोर जैसे शहरों पर एज डेटा सेंटर स्थापित करने और डिजास्टर रिकवरी साइट के रूप में संभावित स्थानों के रूप में नजर गड़ाए हुए हैं। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *