अगले साल गेहूं की हो सकती है बंपर पैदावार, किसानों ने की है रिकॉर्ड बुवाई 

मुंबई- देश में 2023 में गेहूं की बंपर फसल होने की उम्मीद है, क्योंकि मिट्टी की नमी की भरपाई से किसानों ने पिछले साल की तुलना में ज्यादा बुवाई की है। इस साल भारी गर्मी के कारण उत्पादन में कटौती हुई है। गेहूं का ज्यादा दुनिया के दूसरे सबसे बड़े अनाज उत्पादक देश भारत को प्रोत्साहित कर सकता है। इस वजह से अनाज के निर्यात पर मई के प्रतिबंध को हटाने पर विचार भी भारत कर सकता है। साथ ही लगातार उच्च खुदरा महंगाई पर चिंताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि गेहूं का क्षेत्र पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में भारत के पारंपरिक अनाज बेल्ट में लगभग पहाड़ी तक पहुंच गया है। किसान देश के पश्चिम हिस्से में कुछ बंजर भूमि पर भी फसल लगा रहे हैं। यहां पर किसानों ने पारंपरिक रूप से दलहन और तिलहन उगाए हैं। ओलम एग्रो इंडिया के उपाध्यक्ष नितिन गुप्ता ने बताया, गेहूं की कीमतें बहुत ज्यादा हैं। हम गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में एक बड़ी पैदावार देख सकते हैं, जहां किसान बंजर भूमि पर गेहूं की खेती कर रहे हैं।

घरेलू गेहूं की कीमतें 2022 में अब तक 33% उछलकर रिकॉर्ड 29,000 रुपये प्रति टन हो गई हैं। यह सरकार द्वारा निर्धारित खरीद मूल्य 21,250 रुपये से कहीं अधिक है। गेहूं की कीमतों में उछाल अनाज के निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद है, जो इस साल के उत्पादन में कहीं बड़ी गिरावट का संकेत है।

देश में वर्ष में केवल एक बार ही गेहूं की फसल उगाई जाती है, जिसकी बुवाई अक्तूबर और नवबंर में होती है। मार्च से कटाई शुरू होती है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, किसानों ने 1 अक्तूबर से 15.3 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई की है। यह एक साल पहले की तुलना में लगभग 11 फीसदी अधिक है।

एक किसान रमनदीप सिंह मान ने कहा, पंजाब और हरियाणा में बहुत सारे किसानों ने अपनी बुवाई को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। उनका यह मानना है कि जल्दी बोई जाने वाली फसल मार्च के अंत और अप्रैल की शुरुआत में तापमान बढ़ने से पहले कटाई के लिए तैयार हो जाएंगी। क्योंकि उसके बाद ज्यादा गर्मी से फसलें मुरझा जाती हैं। ज्यादा कीमत पाने के लिए किसान लोकवान और शरबती जैसी बेहतर गेहूं की किस्मों को भी चुन रहे हैं। यह प्रीमिम ग्रेड की फसल है।

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