15 फीसदी बढ़ सकता है प्रीमियम बासमती चावल का निर्यात 

मुंबई। भारत के प्रीमियम बासमती चावल के निर्यात में पिछले साल की तुलना में 15% की वृद्धि होने की संभावना है। ऐसा इसलिए क्योंकि मध्य पूर्व के प्रमुख खरीदार कीमतों में लगभग एक चौथाई की वृद्धि के बावजूद अपना भंडार बढ़ाना चाहते हैं। जानकारों का कहना है कि ज्यादा बासमती निर्यात से स्थानीय कीमतें स्थिर रहेंगी। इससे भारतीय किसानों को धान की कीमतों को रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचाकर अधिक कमाई करने में मदद मिलेगी।

ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया ने कहा, यूक्रेन युद्ध के बाद खरीदार अचानक आपूर्ति बाधित होने से डरते हैं। हर खरीदार पर्याप्त भंडार रखने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत 4.5 मिलियन टन से अधिक निर्यात कर सकता है। एक साल पहले की तुलना में यह 15% अधिक रहेगा।

व्यापार मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि 2022/23 की पहली छमाही में निर्यात 11% बढ़कर 2.16 मिलियन टन हो गया। सेठिया ने कहा कि इस साल के उच्चतम स्तर से माल ढुलाई शुल्क में तेज गिरावट भी आयातकों को अधिक खरीदारी करने के लिए प्रेरित कर रही है।

भारत, दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। मुख्य रूप से मध्य पूर्व में शीर्ष ग्रेड बासमती चावल और अफ्रीकी और एशियाई देशों को गैर-बासमती चावल निर्यात करता है। स्थानीय कीमतों को रोकने के लिए गैर-बासमती चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है।

पारंपरिक रूप से भारतीय बासमती चावल का सबसे बड़ा खरीदार ईरान है। यह पिछले कुछ महीनों में सक्रिय रूप से खरीदारी कर रहा था। लेकिन बाद में इराक और सऊदी अरब जैसे देश भी देर से सक्रिय हो गए। भारत के बासमती चावल के निर्यात में ईरान, सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और यमन का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है। पिछले कुछ महीनों में निर्यात कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन अभी भी मांग है। ईरान अभी कम खरीद रहा है, लेकिन सऊदी अरब और इराक ने पिछले महीने 150,000 टन चावल की खरीदी की है। निर्यात मूल्य एक साल पहले के 1,160 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 1,450 डॉलर प्रति टन हो गया है।

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