देश की जीडीपी दर 6.3 फीसदी बढ़ी, लेकिन पहली तिमाही से आधी रही 

मुंबई- दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के दौरान भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.3 फीसदी रही है। यह ग्रोथ रेट इससे पिछली तिमाही में रही ग्रोथ रेट से काफी कम है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 13.5 फीसदी रही थी। वहीं, पिछले साल जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट 8.4 फीसदी रही थी।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बुधवार शाम दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकडे जारी किए हैं। दूसरी तिमाही में कोविड-19 से जुड़े प्रतिबंध नहीं थे। लेकिन आरबीआई द्वारा लगातार प्रमुख ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने से जीडीपी ग्रोथ रेट पर असर पड़ा। आरबीआई ने पिछले कुछ समय से महंगाई पर काबू पाने के लिए लगातार रेपो रेट को बढ़ाया है।

सरकारी आंकड़ों में बताया गया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के लिए नॉमिनल जीडीपी का अनुमान 16.2 फीसदी है। वहीं, दूसरी तिमाही में स्थिर कीमतों पर जीवीए ग्रोथ रेट का अनुमान 6.6 फीसदी है। एनएसओ ने बताया कि सभी सेक्टर्स प्री-कोविड लेवल को पार कर गए हैं। दूसरी तिमाही में ट्रेड, होटल्स, ट्रांसपोर्ट, ब्रोडकास्टिंग से जुड़ी कम्युनिकेशन एंड सर्विसेज सेक्टर ने 14.7 फीसदी के रूप में डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की है।

प्रेस रिलीज में कहा गया, ‘रियल जीडीपी या स्थिर (2011-12) कीमतों पर जीडीपी के दूसरी तिमाही में 38.17 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह एक साल पहले की समान अवधि में 35.89 लाख करोड़ रुपये थी। इस तरह पिछली बार की 8.4 फीसदी ग्रोथ रेट के मुकाबले इस बार 6.3 फीसदी ग्रोथ रेट रही है।’

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने जुलाई-सितंबर 2022 तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। जबकि भारतीय स्टेट बैंक की रिपोर्ट में इसके 5.8 फीसदी रहने की संभावना जतायी गयी थी। इस महीने प्रकाशित भारतीय रिजर्व बैंक के एक बुलेटिन में जीडीपी वृद्धि दर 6.1 से 6.3 फीसदी तक रहने की संभावना जतायी गयी थी। चीन की आर्थिक वृद्धि दर इस साल जुलाई-सितंबर तिमाही में 3.9 फीसदी रही थी।

देश के आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों की ग्रोथ रेट अक्टूबर महीने में सुस्त पड़कर 0.1 प्रतिशत रही है। यह 20 महीने का निचला स्तर है। इसका कारण कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पादों और सीमेंट के उत्पादन में कमी आना है। बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, एक साल पहले इसी महीने में बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत थी।

वहीं पिछले महीने सितंबर में बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही थी। इससे पहले, फरवरी 2021 में आठ बुनियादी उद्योगों कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पादों, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली की वृद्धि दर में 3.3 प्रतिशत की गिरावट आई थी। बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-अक्टूबर के दौरान 8.2 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले इसी अवधि में 15.6 प्रतिशत थी।

आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर महीने में कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद और सीमेंट क्षेत्र के उत्पादन में गिरावट आई। हालांकि, समीक्षाधीन महीने में उर्वरक उत्पादन 5.4 फीसदी बढ़ गया। कोयला, इस्पात और बिजली उत्पादन में वृद्धि दर घटकर क्रमश: 3.6 फीसदी, 4.0 फीसदी और 0.4 फीसदी रही। इन आंकड़ों का असर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) पर पड़ता है। अक्टूबर महीने के लिए आईआईपी के आंकड़े सरकार दिसंबर के दूसरे हफ्ते में जारी कर सकती है। आईआईपी में आठ उद्योगों की हिस्सेदारी 40.27 फीसदी है।

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