मुद्रा लोन में भी भारी भरकम कर्ज हो रहा है एनपीए, देखिए कितनी है रकम 

मुंबई- मुद्रा लोन की शुरुआत 8 अप्रैल 2015 को हुई थी। इसके तहत मुख्य सूक्ष्म व लघु उद्योगों को 10 लाख रुपये तक का कर्ज मुहैया कराने के लिए हुई थी। इसके तहत लोन लेने वाले लाभार्थियों ने ईएमआई चुकाने में आमतौर पर बैंक से कर्ज लेने वालों के मुकाबले अधिक अनुशासन का प्रदर्शन किया है। की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस स्कीम के तहत लिए गए लोन का एनपीए पूरे बैंकिंग सेक्टर के एनपीए से लगभग आधा है। 

यह बात एक आरटीआई में सामने आई है। मुद्रा लोन के तहत जिन भी बैंकों ने लोन दिया है 8 अप्रैल 2015 से जून 2022 तक उनका एनपीए या बैड लोन 46,053 करोड़ रुपये का रहा है। यह इस योजना के अंतर्गत दिए गए कुल लोन का केवल 3.38 फीसदी है। वहीं, पूरे बैंकिंग सेक्टर की बात करें तो इस साल मार्च के अंत में यह 5.97 फीसदी थी।  

खबर के मुताबिक, 2021-22 में बैंकिंग क्षेत्र का एनपीए (5.97 फीसदी) पिछले 6 सालों से बेहतर रहा था. यह 2020-21 में 7.3 फीसदी, 2019-20 में 8.2 फीसदी, 2018-19 में 9.1 फीसदी, 2017-18 में 11.2 फीसदी, 2016-17 में 9.3 फीसदी और 2015-16 में 7.5 फीसदी रहा था. 

माइक्रो यूनिट डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (मुद्रा) की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसके तहत गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि, लघु व सूक्ष्म उद्योग को लोन दिया जाता है. इसे आमतौर पर प्रधानमंत्री मुद्रा योजना कहा जाता है. इस योजना के तहत 3 श्रेणियों में लोन दिया है। ये तीन कैटेगरीज हैं- शिशु (50,000 रुपये तक), किशोर (50,001-5 लाख रुपये तक) और तरुण (5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक). इनमें सबसे कम एनपीए 2.25 फीसदी शिशु लोन का रहा है। वहीं, दूसरे स्थान पर 2.29 फीसदी के साथ तरुण लोन है. जबकि 50,001-5 लाख रुपये के तरुण लोन का एनपीए 4.49 फीसदी के साथ सर्वाधिक रहा है।

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