एम्स का सर्वर हैक कर क्रिप्टो में मांगी 200 करोड़ रुपये की फिरौती 

मुंबई- देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एम्स दिल्ली का सर्वर हैक करने वालों ने 200 करोड़ रुपए की डिमांड की है। हैकर्स ने पेमेंट क्रिप्टोकरंसी के जरिए करने को कहा है। बता दें कि एम्स का सर्वर बुधवार यानी 23 नवंबर को रैनसमवेयर अटैक करके हैक कर लिया गया था। इससे अस्पताल की सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। 

अस्पताल की ओपीडी और आईपीडी में आने वाले मरीजों का इलाज करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सर्वर ठप होने के कारण ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने और टेलीकंसल्टेशन जैसी डिजिटल सेवाएं भी प्रभावित रहीं। हालांकि, इन सभी सेवाओं को मैनुअल तौर पर चलाया जा रहा है। 

नेटवर्क की पूरी तरह से सफाई करने में 5 दिन और लगने की संभावना है। इसके बाद ई-हॉस्पिटल सेवाएं शुरू की जा सकती हैं। OPD, इमरजेंसी, इन पेशेंट लेबोरेटरी आदि सेवाओं को मैनुअल मोड पर जारी रखा जा रहा है। एम्स में सुबह 6 बजकर 45 मिनट पर इमरजेंसी लैब के कंप्यूटर सेंटर से मरीजों की रिपोर्ट नहीं मिलने की शिकायत आती है। इसके बाद बिलिंग सेंटर और डिपार्टमेंट से भी कुछ इसी तरह के कॉल आने लगते हैं। एनआईसी की टीम ने जांच की तो पता चला कि मेन सर्वर पर सारी फाइलें नहीं खुल रही हैं। 

जब टीम ने पहले बैकअप सिस्टम के जरिए फाइलों को रीस्टोर करने की कोशिश की तो पता चला कि इसमें भी सेंध लग चुकी है। फिर आगे जांच हुई तो पता चला कि फाइलों को क्लाउड में जिस एक्सटेंशन यानी ई पते पर रखा जाता है, उसे भी बदल दिया गया है। साइबर हमले की बात पुख्ता हो गई। इसके लिए भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रेस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) की भी मदद ली गई। 

एम्स के 50 में से 20 सर्वर की स्कैनिंग का काम पूरा हो चुका है। एक्सपर्ट्स टीम बाकी के सर्वर के सैनिटाइजेशन के काम के लिए 24 घंटे काम कर रही है। NIC ई-हॉस्पिटल डेटाबेस और ई-हॉस्पिटल के लिए एप्लिकेशन सर्वर बहाल कर दिए गए हैं। 5 हजार सिस्टम में दोबारा एंटीवायरस सिस्टम फीड किया जा रहा है। 

दिल्ली पुलिस ने 25 नवंबर को मामले में जबरन वसूली और साइबर टेररिज्म का केस दर्ज किया था। जांच एजेंसियों की सिफारिश पर अस्पताल में कंप्यूटरों पर इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। एम्स के सर्वर में पूर्व प्रधानमंत्रियों, मंत्रियों, बड़े अफसरों, जजों समेत कई वीआईपी का डेटा स्टोर है। 

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