निवेश के लिए बेहतर हैं टैक्स बचत एफडी और शेयर 

सेंसेक्स और निफ्टी पिछले साल अक्तूबर के रिकॉर्ड आंकड़े को पार कर चुके हैं। उम्मीद है कि बाजार यहां से तेजी में ही रहेगा। दूसरी ओर आरबीआई अगली बैठक में एक बार फिर दरों को बढ़ाने का विचार कर रहा है। ऐसे में बैंक कर्ज और जमा पर ब्याज बढ़ाएंगे।  

यस सिक्योरिटीज का मानना है कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था ज्यादा तेज बढ़ेगी। ऐसे में ​अगले साल मार्च तक निफ्टी-50 का स्तर 20 हजार को पार कर सकता है। लंबी अवधि में यह मार्च, 2026 तक 35 हजार तक जा सकता है। सेंसेक्स इसी अवधि में 1,25,000 को छू सकता है। सिक्योरिटीज का मानना है कि इस दौरान कंपनियों की आय बेहतर होगी। साथ ही रुपया और अमेरिकी बॉन्ड का यील्ड अगर स्थिर रहता है तो विदेशी निवेशक बाजार में वापस बने रहेंगे।  

दूसरी ओर अगर आप टैक्स फ्री फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में ज्यादा ब्याज चाहते हैं तो आपको एक हफ्ते और इंतजार करना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 39वीं मैद्रिक नीति स​मिति की बैठक 5-7 दिसंबर को होगी। उम्मीद है कि रेपो रेट एक बार फिर बढ़ेगा। हालांकि, पहले की तुलना में कम बढ़ेगा। क्योंकि अक्तूबर के महंगाई के आंकड़े 7 फीसदी से नीचे आ गए हैं। ऐसे में इस बार रेपो दर 0.50 फीसदी के बजाय 0.25 से 0.35 फीसदी बढ़ सकता है।  

मई से लेकर सितंबर तक आरबीआई ने चार बार मेें रेपो दर में 1.90 फीसदी की बढ़ोतरी की है। इससे कई छोटे-मोटे बैंक एफडी पर 8 से 8.5 फीसदी तक का ब्याज दे रहे हैं। बैंकों के जमा और कर्ज में भी बहुत अंतर है। हाल में आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दात ने बैंक प्रमुखों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने कहा कि जमा और कर्ज की वृद्धि की रफ्तार को ध्यान रखते हुए बैंकों को इसके जोखिम को समझना चाहिए। इसका मतलब यह है कि बैंकों को और ज्यादा पैसा जुटाना चाहिए। कर्ज वृद्धि की रफ्तार 17 फीसदी है जबकि जमा की वृद्धि केवल 9.5 फीसदी है। ऐसे में बैंकों को भारी-भरकम कर्ज को बांटने के लिए पैसा चाहिए जिससे वे जमा पर ब्याज बढ़ा रहे हैं और आगे भी बढ़ाएंगे। यस सिक्योरिटीज के प्रमुख अमर अंबानी कहते हैं कि बैंकों को तो ब्याज बढ़ाना ही होगा। हालांकि, बैंक फिलहाल बॉन्ड के जरिये रकम जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, पर वह भी कर्ज बांटने के लिए नाकाफी होगी।  

टैक्स बचाने वाली एफडी इस समय उन निवेशकों के लिए पसंदीदा हैं, जो रूढि़वादी हैं। हालांकि, इनमें पांच साल से पहले पैसा नहीं निकाल सकते हैं। हर वित्त वर्ष में आयकर की धारा 80 सी के तहत केवल 1.5 लाख रुपये ही टैक्स में बचा सकते हैं। इस एफडी को मासिक या तिमाही आधार पर पेआउट के लिए खोल सकते हैं। इस समय पांच सरकारी बैंक टैक्स बचत एफडी में सबसे ज्यादा ब्याज दे रहे हैं जो 7.25 फीसदी तक है।  

इस समय सामान्य एफडी पर भी 8 फीसदी तक ब्याज मिल रहा है। कुछ बैंकों ने विशेष एफडी की स्कीम भी चालू की है। इसमें एक तय अवधि के लिए ज्यादा ब्याज मिल रहा है। हालांकि इन सभी विकल्पों के बावजूद भी आप अगर 8 दिसंबर तक रुकते हैं तो हो सकता है कि आपको 0.25 से 0.50 फीसदी तक ज्यादा ब्याज जमा पर मिल जाए।  

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