रिटायरमेंट बचत योजना में होगा बदलाव, रिटायर पर मिलेगा ज्यादा पैसा 

मुंबई- केंद्र सरकार जल्द ही कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम के लिए वेतन सीमा में बदलाव कर सकती है। इससे कर्मचारियों और कंपनी के अनिवार्य योगदान में वृद्धि होगी। जिससे कर्मचारियों को उनके रिटायरमेंट के लिए ज्यादा बचत करने में मदद मिलेगी। इस निर्णय के बाद पहले से ज्यादा कर्मचारी कर्मचारी भविष्य निधि के दायरे में आ जाएंगे।  

अभी ईपीएफओ की कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) योजना के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये प्रति माह है। इसे अंतिम बार 2014 में 6,500 रुपये प्रति माह से बढ़ा दिया गया था। पीएफ उन कंपनियों को काटना होता है, जहां 20 या इससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं। 

ज्यादा वेज सीलिंग तय करने के लिए जल्द ही एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन होगा, जिसे महंगाई के हिसाब से इंडेक्स किया जाएगा। ईपीएफओ के तहत न्यूनतम वेतन सीमा को 15,000 से बढ़ाकर 21,000 किया जाएगा। यह श्रम मंत्रालय द्वारा संचालित सरकार की दो सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बीच समानता लाएगा। इससे प्रतिष्ठानों पर अनुपालन बोझ कम होगा। 

वेतन सीमा बढ़ने से कर्मचारी और नियोक्ता की तरफ से जमा किये जाने वाले पीएफ का अंश ज्यादा हो जाएगा। अभी यह 12 फीसदी की दर से 15,000 रुपये वेतन पर 1,800 रुपये है। अगर इसे बढ़ाकर 21,000 किया जाता है तो यह 2,530 रुपये हो जाएगा। इससे भविष्य में तैयार होने वाला पेंशन फंड मौजूदा से ज्यादा हो जाएगा। 

अगर इसे बढ़ाकर 21,000 रुपये प्रति माह किया जाता है तो ईपीएफओ के दायरे में लगभग 75 लाख और कर्मचारी आएंगे। अभी इनकी संख्या 6.8 करोड़ है। ईपीएफओ अंशधारकों को भविष्य निधि लाभ के अलावा पेंशन के साथ-साथ योजना के तहत बीमा लाभ भी मिलते हैं। 

हालाँकि, इस कदम से नियोक्ताओं के लिए वार्षिक वेतन लागत में वृद्धि हो सकती है, जिन्हें उच्च वेतन पर ईपीएफ योगदान करने और अधिक कवर करने और अधिक कर्मचारियों को कवर करने की आवश्यकता होगी। नियोक्ताओं ने सुझाव दिया है कि ईपीएफओ की मूल संरचना को बदलने से पहले सरकार इसके प्रभाव का पूरी तरह से आकलन करे। 

ईपीएफओ ने इस साल की शुरुआत में इस योजना के तहत कर्मचारी सीमा और वेतन सीमा को खत्म करने की योजना बनाई। इससे न केवल औपचारिक कर्मचारी बल्कि स्वरोजगार करने वाले लोग भी सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत नामांकन कर सकेंगे। हालांकि, इस प्रस्ताव को नियोक्ताओं के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा।  

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