तीन दिन में पांच फीसदी तक बढ़ गई खाने पीने के सामान की कीमतें 

मुंबई- अक्तूबर महीने में भले ही खुदरा महंगाई की दर 7 फीसदी के नीचे पहुंच गई हो, लेकिन पिछले तीन दिन में खाने पीने के सामान की कीमतों में 5 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ सामानों को छोड़कर बाकी के दाम में तेजी आई है। इसके अनुसार, चावल का भाव बुधवार को 37.96 रुपये किलो था जो 20 नवंबर को 38.29 रुपये था।  

इसी दौरान गेहूं का भाव 30.87 रुपये से बढ़कर 31.61 रुपये, चना दाल की कीमत 71.78 रुपये से बढ़कर 74.21 रुपये और अरहर दाल का दाम 111.75 रुपये से बढ़कर 113.16 रुपये किलो हो गया। हालांकि, इस दौरान तीन चीजों की कीमतें मामूली घटी हैं। इनमें चायपत्ती 280.65 रुपये से घटकर 276.08 रुपये हो गई है। जबकि नमक का भाव 22.45 से घटकर 21.61 रुपये किलो हो गया है। सरसों का तेल 171.40 रुपये से घटकर 170.74 रुपये पर आ गया है। उड़द दाल की कीमत 106.72 से बढ़कर 109.17 रुपये किलो और मसूर दाल 94.23 से 96.31 रुपये पर पहुंच गई है। मूंग दाल 102 रुपये से बढ़कर 104 रुपये किलो पर पहुंच गई है। 

आंकड़ों के अनुसार, सोया तेल की कीमत 155.17 से बढ़कर 155.62 रुपये लीटर हो गई है। पाम तेल का भाव इसी दौरान 117.55 से बढ़कर 118.39 रुपये लीटर हो गया है। दूध की कीमत 53.86 रुपये से बढ़कर 55.18 रुपये लीटर जबकि मूंगफली तेल का भाव 188.51 से बढ़कर 190.86 रुपये लीटर हो गया है। 

उधर, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चा तेल समेत कई जरूरी कमोडिटी के दाम घटने से जो राहत मिलती नजर आ रही है, वह गायब हो सकती है। डीजल की किल्लत बढ़ने वाली है।अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर भारतीय बाजार में इसकी कीमतों पर हो सकता है। अमेरिका में डीजल का स्टॉक करीब 40 साल के निचले स्तर पर आ गया है। यूरोप में भी करीब-करीब यही हाल है। मार्च तक हालात और खराब होंगे, जब समुद्र के रास्ते रूस से डीजल आयात पर प्रतिबंध लागू होंगे। भारत में डीजल की सबसे ज्यादा खपत ट्रांसपोर्ट और कृषि में होती है। दाम बढ़ने पर यही दोनों सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। डीजल के दाम बढ़ने से खेती से लेकर उसे मंडी तक लाना महंगा हो जाता है। इससे आम आदमी और किसान दोनों का बजट बिगड़ सकता है। 

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