चालू वित्त वर्ष में बिकेंगे 38 लाख यात्री वाहन, अब तक का होगा रिकॉर्ड 

मुंबई- वित्त वर्ष 2023 में देश में रिकॉर्ड 38 लाख यात्री वाहन बिक सकते हैं। हालांकि, यह मजबूत मांग 2023-24 में नहीं रहेगी क्योंकि पहले ही मांग बहुत ज्यादा रही थी। टाटा मोटर्स के यात्री वाहन के प्रबंध निदेशक शैलेष चंद्रा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यात्री वाहनों के लिए काफी मजबूत रही थी और इस दौरान 19 लाख वाहन बिके थे। हर साल का अगर रुझान देखें तो पहली छमाही में 52 फीसदी और दूसरी छमाही में 48 फीसदी वाहन बिकते हैं। पर इस समय आप इसे 50-50 के अनुपात में देख सकते हैं। 

उन्होंने कहा कि इस साल हम इस उद्योग में अब तक की सबसे ज्यादा बिक्री देखेंगे। 2021-22 में सियाम के अनुसार, कुल 30.69 लाख यात्री वाहन बिके थे। उससे पहले 2018-19 में 33.77 लाख यात्री वाहन बिके थे जो अब तक का रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि उद्योग उस गति को बनाए रखेगा जो हम पिछली तिमाहियों में देख रहे हैं।  

उद्योग के लिए इस तिमाही में ध्यान खुदरा पर रहेगा। उठाव में कमी होगी क्योंकि सभी कंपनियां भंडार को कम करना चाहेंगे। ऐसा इसलिए कि कैलेंडर वर्ष अब खत्म हो रहा है। सेमीकंडक्टर आपूर्ति मजबूत रही है। इसके परिणामस्वरूप पिछली तिमाही में उद्योग में 10 लाख वाहनों की आपूर्ति हुई थी। इस तिमाही में भी सेमीकंडक्टर आपूर्ति के कारण हमें कोई बड़ा मामला नहीं दिख रहा है। 

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक कारें भविष्य का ट्रांसपोर्ट हो सकती हैं, लेकिन पेट्रोल-डीजल कारों की डिमांड कम नहीं हुई है। बड़ी घरेलू कंपनियां पारंपरिक कारों का उत्पादन बढ़ाने पर 21,000 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने वाली हैं। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, किआ मोटर्स, ह्युंडई, टोयोटा जैसी कंपनियां पेट्रोल-डीजल कारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में जुटी हैं। 

ऐसी कारों की डिमांड का हाल ये है कि इनके लिए 20-22 महीने की वेटिंग चल रही है। 8 लाख से ज्यादा कारों की डिलीवरी पेंडिंग है। इसमें 99% पेट्रोल-डीजल कारें हैं। इसीलिए मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर्स के मुताबिक, ये कंपनियां पेट्रोल-डीजल कारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर करीब 20 हजार करोड़ खर्च करेंगी। 

महिंद्रा एंड महिंद्रा: अगले एक-डेढ़ साल में SUV मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाकर सालाना 6 लाख करेगी। अभी कंपनी हर साल 3-3.5 लाख SUV बनाती है। उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनी 3 साल में 8,000 करोड़ रुपए खर्च करेगी। 

टाटा मोटर्स: उत्पादन क्षमता सालाना 6 लाख से बढ़ाकर 9 लाख करने करेगी। साणंद प्लांट चालू होने के बाद मासिक उत्पादन क्षमता 25-30 हजार बढ़ेगी। उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर कंपनी 6,000 करोड़ रुपए खर्च करने जा रही है। 

मारुति सुजुकी: देश की सबसे बड़ी कार कंपनी ने हरियाणा में नए प्लांट के निर्माण सहित क्षमता विस्तार की अन्य योजनाएं भी बनाई है। इन पर 7,000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। कंपनी पेट्रोल-डीजल वेरिएंट में नए मॉडल लॉन्च करेगी। 

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