घाटे वाली सरकारी कंपनियां होंगी बंद, जाना होगा दिवालिया अदालत में  

मुंबई- सरकार ने कहा है कि घाटे में चलने वाली सरकारी उपक्रमों को बंद करने के लिए कंपनियों को दिवाला अदालत में जाना चाहिए। क्योंकि इससे तेजी से समाधान की उम्मीद है। सरकार इन कंपनियों में अपनी होल्डिंग कम करना चाहती है।  

सोमवार को इसके लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए। इसके अनुसार, ऐसी कंपनियों को शीर्ष कैबिनेट मंत्रियों की एक समिति से तीन महीने के भीतर घाटे में चल रही कंपनी के समाधान के लिए इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) में एक दिवालियापन आवेदन दाखिल करना होगा। सरकार उस दिन से लगभग नौ महीनों में घाटे में चलने वाली इकाइयों को बंद करने की सोच रही है जिस दिन से कोई फर्म ऐसा करने की मंजूरी मांगती है। 

मूल कंपनियों के बोर्ड को उनकी सहायक कंपनियों की भूमि संपत्तियों को अलग करने के लिए कहा गया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भूमि विवाद अब से इकाइयों को बंद करने में बाधा न बने। फर्मों को पट्टे पर दी गई भूमि के लिए राज्य सरकारों से देय किसी भी मुआवजे को बट्टे खाते में डालने के लिए भी कहा गया है। 

सरकार ने कहा कि राज्य द्वारा संचालित फर्म भी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से संपर्क करके अपनी इकाइयों को बंद करने का विकल्प चुन सकती हैं। वर्तमान में ऐसा नियम है। इससे सरकारी कंपनियों को कम करने में मदद मिलेगी। सरकार लगातार विनिवेश के जरिये इनकी संख्या कम भी कर रही है। 

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