क्या आपके पास अभी है इमरजेंसी फंडइस वजह से आपके पास निश्चित रूप से होना चाहिए ये फंड 

(दीपक जैन, हेड- सेल्स, एडलवाइज एएमसी) 

मुंबई- दुनिया के एक समय के सबसे शानदार जहाज टाइटैनिक (Titanic) ने हर चीज सही किया लेकिन बस वह आपात स्थिति के लिए तैयार नहीं था. जहाज पर 2000 से ज्यादा लोग सवार थे लेकिन उस पर केवल 20 लाइफबोट्स थे क्योंकि ऐसा माना जा रहा था कि वह जहाज कभी डूबेगा ही नहीं. हालांकि, जीवन बिल्कुल अप्रत्याशित है। और किसी भी तरह की अनिश्चितता के लिए तैयार रहना सबसे अहम होता है. ऐसे ही वक्त में इमरजेंसी फंड काम होता है. इमरजेंसी फंड क्या होता है और ये किस प्रकार है? आइए पता लगाते हैं… 

इमरजेंसी फंडः जरूरत के समय काम आने वाला फंड ही वास्तविक फंड है 

इमरजेंसी फंड ऐसा फंड होता है जो आपको सपोर्ट करता है। आप वित्तीय संकट की स्थिति में वित्तीय मदद के लिए इस पर भरोसा कर सकते हैं। आप इसे उस रकम के तौर पर देख सकते हैं जिसे विभिन्न तरह की आपात स्थिति के लिए अलग रखा जाता है। इनमें नौकरी जाना, अचानक किसी चीज की मरम्मत की जरूरत या मेडिकल से जुड़े खर्चे शामिल हैं। ऐसे में यह निश्चित रूप से आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा होना चाहिए।  

आदर्श रूप से आपके पास ऐसे फंड का कवर होना चाहिए, जिससे आपके खर्चे कम-से-कम छह महीने तक पूरे हो जाएं। इसके साथ ही आपको किसी भी सामान्य खर्चे के लिए इसमें से रकम नहीं निकालना चाहिए। 

इमरजेंसी फंड – होना ही चाहिए  

इमरजेंसी फंड का महत्व काफी अधिक है। यहां कुछ कारण दिए गए हैं कि आपके पास इमरजेंसी फंड क्यों होना चाहिए। 

कर्ज के जाल में फंसने से बचने के लिए 

कल्पना कीजिए कि आप किसी आपात स्थिति में फंस गए हैं और आपके पास कोई बचत नहीं है. स्वाभाविक तौर पर आप कर्ज लेंगे। इमरजेंसी फंड रहने से आप कर्ज के जाल से स्मार्ट तरीके से बाहर निकल आएंगे।  

आप शांतिपूर्ण जीवन जी सकते हैं 

वित्तीय कठिनाइयों का असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ता है. तनाव से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। एक इमरजेंसी फंड से यह सुनिश्चित होता है कि आप स्वस्थ एवं शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर पाएं।    

आप जीवन के लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं  

आप कभी ऐसा नहीं चाहेंगे कि किसी भी तरह की इमरजेंसी की वजह से किसी और लक्ष्य के लिए रखा गया आपका पैसा बर्बाद हो जाए। इसकी जगह पर आपको एक इमरजेंसी फंड के जरिए इन चीजों की योजना बनानी चाहिए।     

आप अपने रुपये में बढ़त को रख सकते हैं बरकरार  

लंबी अवधि के निवेश से धन की वृद्धि में मदद मिलती है क्योंकि आपको पावर ऑफ कम्पाउंडिंग का लाभ मिलता है। इसका मतलब ये है कि आप ना सिर्फ अपने वास्तविक निवेश पर रिटर्न प्राप्त करते हैं बल्कि इस पर मिले रिटर्न पर भी आपको रिटर्न मिलता है। लेकिन अगर इमरजेंसी के दौरान अपना निवेश निकाल लेते हैं तो आप खुद को इन बेनिफिट्स से वंचित कर देते हैं। 

इमरजेंसी फंड का होना अहम है लेकिन यह कठिन काम नहीं है। आप कुछ साधारण कदम उठाकर किसी भी तरह की आपात स्थिति के लिए तैयार हो सकते हैं। 

इमरजेंसी फंड कैसे तैयार करें- ये रहे कुछ टिप्स   

अलग-अलग लोगों का इमरजेंसी फंड क्रिएट करने का तरीका अलग-अलग होता है। लेकिन यहां कुछ आम कदम हैं जिससे मदद मिल सकती हैः    

बजट बनाना 

सबसे पहले अपने मासिक खर्चे और आमदनी का आकलन कीजिए- आपके पास कितने रुपये हैं, आप कितना अधिक खर्च करते हैं, आप कितनी अधिक बचत करते हैं। 

कुछ कैलकुलेशन कीजिए 

अपने हर महीने के खर्च को तीन और छह से गुणा कीजिए। अब आप यह निर्धारित कर पाएंगे कि आपको कम-से-कम कितने रुपये चाहिए। उदाहरण के लिए अगर आपका हर महीने का खर्च 20 हजार रुपये आता है तो आपको इमरजेंसी फंड के रूप में 60 हजार रुपये से 1.20 लाख रुपये तक की जरूरत पड़ सकती है। 

अपने खर्चों का नए सिरे से आकलन कीजिए और उसमें कटौती कीजिए  

फंड तैयार करने के लिए आपको हर महीने कुछ पैसे अलग रख देने चाहिए। अचानक यह फंड तैयार करना बिल्कुल भी आसान काम नहीं रहने वाला है। हालांकि, लाइफस्टाइल में कुछ समय तक किए जाने वाले बदलावों से फंड पर बहुत अधिक असर पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आप हर वीकेंड पर बाहर खाना खाने जाते हैं तो आप पैसे बचाने के लिए एक या दो वीकेंड पर ऐसा करने से बच सकते हैं। 

जो बचत करते हैं, उसे करिए इंवेस्ट   

हर महीने महज कुछ रुपयों की बचत से मदद नहीं मिलेगी क्योंकि महंगाई दर से इसके मूल्य में जबरदस्त कमी आ सकती है। सेविंग अकाउंट में पैसे रखना बुद्धिमानी नहीं है क्योंकि इस पर बहुत कम रिटर्न मिलता है। फिक्स्ड डिपोजिट पर भले ही बेहतर रिटर्न मिलता हो लेकिन आप एक खास अवधि के लिए अपने पैसे को लॉक कर देते हैं। ऐसे में कई तरह के इंवेस्टमेंट में से आपको किसी एक का चुनाव करना चाहिए जो ना सिर्फ अच्छा रिटर्न देते हों बल्कि काफी अधिक लिक्विड भी हों। उदाहरण के लिए आप लिक्विड फंड्स और ओवरनाइट फंड्स जैसे कई तरह के डेट फंड्स पर गौर कर सकते हैं। लिक्विड फंड्स 91 दिन तक की मेच्योरिटी वाली सिक्योरिटीज में इंवेस्ट करते हैं. वहीं, ओवरनाइट फंड्स एक कामकाजी दिन की मेच्योरिटी वाली सिक्योरिटी में निवेश करते हैं. ये दोनों फंड बहुत लिक्विड एवं एक्सेसबल होते हैं।  

आखिर में…  

जीवन की अनिश्चितताओं की वजह से इमरजेंसी फंड का होना आवश्यक है। हालांकि, पूरा फंड हमेशा एक्सेसेबल होना चाहिए। ऐसे में लिक्विडिटी वाले निवेश के सही विकल्पों में निवेश करना अहम होता है। 

निवशकों को जागरूक बनाने की एडलवाइज म्यूचुअल फंड की पहल 

सभी म्यूचुअल फंड निवेशकों को एक बार अपनी केवाईसी करानी होती है। निवेशकों को केवल रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड (आरएमएफ) के साथ डील करनी चाहिए। केवाईसी, आरएमएफ और किसी भी तरह की शिकायत को दर्ज कराने की प्रक्रियाओं से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए विजिट करें-  https://www.edelweissmf.com/kyc-norms   

(डिस्क्लेमरः दीपक जैन एडलवाइज एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (ईएएमएल) में प्रमुख-सेल्स हैं और ये उनके निजी विचार हैं) 

(म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. योजना से जुड़े सभी दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक पढ़ें.) 

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