एफएसएसएआई के फैसले से पश्चिमी पैकेज्ड फूड का होगा बाजार पर कब्जा 

मुंबई- देश भर के व्यापार संघों और विक्रेताओं के प्रतिनिधि संगठन इंडियन सेलर्स कलेक्टिव ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के फ्रंट ऑफ पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग (एफओपीएनएल) के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है।  

संगठन ने दावा किया है कि एफओपीएनएल भारतीय खाद्य पदार्थों पर अस्वास्थ्यकर का लेबल लगा देगा। इससे एमएसएमई पैकेज्ड खाद्य निर्माताओं और विक्रेताओं को नुकसान होगा। साथ ही भारतीय बाजारों पर कब्जा करने के लिए पश्चिमी पैकेज्ड फूड को नया रास्ता मिल जाएगा। प्रस्तावित विनियमन भारतीय व्यंजनों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के डिजाइन का शिकार बना देगा। 

एफओपीएनएल के तहत डिब्बाबंद वस्तुओं में नमक, चीनी और चर्बी के आधार पर ‘वन-स्टार फूड’, ‘टू-स्टार फूड’ और इस तरह ‘गुड-फूड’, ‘नॉट-गुड फूड’ आदि जैसी स्टार रेटिंग दी जाएगी। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के कई स्थानीय और क्षेत्रीय निर्माता उभरे हैं। ये उभरते हुए कारोबारी प्राकृतिक तरीके से बने खाद्य पदार्थों को पैकेज्ड रूप में तैयार कर और बिक्री के उपलब्ध माध्यमों से बेचकर अपनी आजीविका चला रहे हैं।  

चूंकि, पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में नमक, चीनी और वसा के प्रयोग के अपने वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक कारण हैं, इसलिए इन वस्तुओं को प्रस्तावित गणितीय गणना और स्टार रेटिंग प्रणाली के तहत ‘अस्वास्थ्यकर’ के रूप में चिह्नित कर दिया जाएगा। ऐसा लेबल देखकर ग्राहक उनके उत्पादों को नहीं लेंगे। 

इंडियन सेलर्स कलेक्टिव के राष्ट्रीय समन्वयक अभय राज मिश्रा ने कहा, पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थों के निर्माता सदियों से ग्राहकों के लिए स्वादिष्ट व स्वस्थ विकल्प उपलब्ध कराते हुए क्षेत्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इसलिए इस नए विनियमन के आने से विक्रेताओं के पास इन उत्पादों की आपूर्ति बाधित होगी, जो बड़े रिटेलर्स के सामने खुद को इन्हीं पैकेज्ड फूड के माध्यम से टिकने में सक्षम बनाए हुए हैं।  

दूसरी ओर, वैश्विक पहुंच वाली बहुराष्ट्रीय खाद्य कंपनियां बाजार में प्रवेश करने के लिए रसायनों का उपयोग करती हैं। ये कंपनियां उपलब्ध तकनीकों के माध्यम से बेहतर हेल्थ रेटिंग पाने के लिए अपने खाद्य पदार्थों के न्यूट्रिएंट कंपोजिशन को आसानी से बदलने में सक्षम होती हैं। 

उन्होंने कहा कि भले ही राइस क्रिस्पी खाद्य पदार्थ में बहुत अधिक चीनी होती है, लेकिन इसकी प्रक्रिया और इसमें नट्स, कृत्रिम विटामिन और खनिज आदि मिलाकर इसकी स्टार रेटिंग को सुधारा जा सकता है। दूसरी ओर, पोहा और उपमा जैसे पारंपरिक भारतीय उत्पादों में ऐसा कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इससे उनका स्वाद पूरी तरह से बदल जाएगा। 

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