पीएफ धारकों को लगा झटका, सरकार नहीं बढ़ाएगी पेंशन की रकम 

मुंबई- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के छह करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर्स के लिए जरूरी खबर है। लेबर मिनिस्ट्री ने उनकी पेंशन को बढ़ाने के लिए एक प्रपोजल भेजा था जिसे फाइनेंस मिनिस्ट्री ने ठुकरा दिया। अब एक संसदीय समिति ने वित्त मंत्रालय से इस बारे में स्पष्टीकरण मांगने का फैसला किया है।  

ईपीएफओ सब्सक्राइबर्स की न्यूनतम पेंशन अभी 1000 रुपये है। लेबर मिनिस्ट्री ने इसे बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा था। हालांकि मंत्रालय ने इसमें कितनी बढ़ोतरी का प्रस्ताव भेजा था, इसका पता नहीं चल सका है। श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ के शीर्ष अधिकारियों ने गुरुवार को बीजू जनता दल के सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता में श्रम संबंधी संसदीय स्थायी समिति को ईपीएफ पेंशन योजना के संचालन और इसके कोष के प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।  

अधिकारियों ने समिति को बताया कि वित्त मंत्रालय मासिक पेंशन में किसी भी वृद्धि के लिए श्रम मंत्रालय के प्रस्ताव पर सहमत नहीं था। समिति ने अब इस कदम के संबंध में स्पष्टीकरण मांगने के लिए वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों को बुलाने का फैसला किया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में सदस्य/ विधवा/ विधुर पेंशनभोगी को देय न्यूनतम मासिक पेंशन को कम से कम 2,000 रुपये तक का बढ़ाने की सिफारिश की थी। 

ईपीएफओ ने हाल में पेंशन से संबंधित कुछ नियमों में बदलाव किए थे। छह महीने से भी कम समय में रिटायर होने वाले कर्मचारियों को कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (ईपीएस-95) के तहत जमा राशि निकालने की अनुमति प्रदान कर दी है। फिलहाल ईपीएफओ के सब्सक्राइबर्स को छह महीने से कम सेवा बाकी रहने पर पीएफ अकाउंट से जमा राशि निकालने की ही अनुमति है। ईपीएफओ के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की सोमवार को संपन्न बैठक में यह फैसला किया गया। 

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