लगातार दरें बढ़ाने के बाद भी दुनिया भर में महंगाई ऊंचे स्तर पर  

नई दिल्ली। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक पिछले पांच महीने से लगातार ब्याज दरों को बढ़ा रहे हैं। बावजूद इसके महंगाई की दर उच्च स्तर पर बनी हुई है। महंगाई बढ़ने का प्रमुख कारण ऊर्जा, फर्टिलाइजर, खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी और कच्चे तेल का रिकॉर्ड स्तर पर जाना है।  

विकसित देशों से लेकर विकासशील देश उच्च महंगाई से लड़ने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने का सहारा ले रहे हैं। अमेरिका सहित चीन, जापान, भारत और अन्य देशों ने तीन-चार बार में एक से लेकर 2 फीसदी तक दरों को बढ़ाया है। इस महीने के अंत में भी करीबन एक दर्जन देश ब्याज दरों को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। जबकि 8 देशों ने इसी हफ्ते दरों में इजाफा कर दिया है। 

दुनिया के ज्यादातर देशों में महंगाई की दर 8 फीसदी से ऊपर बनी हुई है। अमेरिका में सीपीआई अगस्त में 8.3 फीसदी रही है जबकि यूरो क्षेत्र में में 9.1 फीसदी रही। यूके में यह 9.9 फीसदी तो ब्रिक्स देशों में भी यह 8 फीसदी से ज्यादा रही है। इसमें ब्राजील में 8.7 फीसदी, रूस में 14.3 फीसदी रही है। हालांकि, चीन में 2.5 फीसदी ही महंगाई की दर है। भारत में भी यह 7 फीसदी है। 

फीसदी, फ्रांस में 5.8 फीसदी, दक्षिण कोरिया में 5.7 और इंडोनेशिया में यह 4.7 फीसदी के स्तर पर है। सबसे बुरा हाल अमेरिका का है। यहां छात्रों का कर्ज 1.7 लाख करोड़ डॉलर बढ़ गया है और अमेरिकी प्रशासन मध्य वर्ग के कर्ज का भार कम करने के लिए एक पैकेज लाने की तैयारी में है। जबकि चीन में घर खरीदारों ने प्रोजेक्ट का बहिष्कार कर दिया है। 119 शहरों में 342 प्रोजेक्ट बहिष्कार के निशाने पर हैं। अगस्त में 100 शहरों में 320 प्रोेजेक्ट का बहिष्कार हुआ था। 

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