महंगाई से राहत पाने के चक्कर में मंदी में फंस रही हैं दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं 

मुंबई- पूरी दुनिया में आसमान छूती महंगाई अब अर्थव्यवस्था के लिए मंदी साबित हो सकती है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा, यह कोई नहीं जानता कि क्या ब्याज दरों के बढ़ने से मंदी आएगी। यदि ऐसा होता है तो यह कितनी महत्वपूर्ण होगी, इसका भी पता नहीं है।  

पावेल ने कहा कि उधारी की आसान नीति की संभावना कम है क्योंकि फेड लगातार चार दशकों में महंगाई की सबसे ज्यादा सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमें महंगाई को पीछे छोड़ना होगा। उधर, विश्लेषकों ने कहा कि शायद यह अमेरिका अंतिम वृद्धि दर होगी क्योंकि यदि आप पिछली नीति को भी देखें तो पहली तिमाही के लिए अनुमान 6 फीसदी से कम है और उसके बाद चीजों में सुधार हुआ है, खासकर महंगाई के मोर्चे पर। बुधवार को अमेरिकी फेडरल ने ब्याज दर में 0.75 फीसदी का इजाफा किया। इसके बाद बृहस्पतिवार को कई देशों ने ब्याज दरें बढ़ा दीं। सभी देश एक तरफ से महंगाई को काबू पाने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने की योजना जारी रखे हैं। 

भारतीय रिजर्व बैंक भी महंगाई को रोकने के लिए मई से लेकर अब तक तीन बार में 1.40 फीसदी दरें बढ़ा चुका है। इसकी मौद्रिक नीति समिति की बैठक 28 से 30 सितंबर के बीच होगी। ऐसा अनुमान है कि 30 सिंतबर को रेपो दर में 0.35 से 0.50 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके साथ ही तमाम तरह के कर्ज महंगे हो जाएंगे। अगर ऐसा होता है तो त्योहारी मौसम में खरीदारी पर सीधा असर होगा। इसका महंगाई का लक्ष्य 6 फीसदी से नीचे है, लेकिन यह लगातार इस लक्ष्य से ऊपर ही बनी है। 

वृद्धि को रोक महंगाई पर काबू पाने की योजना से कई देशों की मुद्रा की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है। इंडोनेशिया कीमुद्रा रुपियाह 0.1 फीसदी गिरी जबकि फिलीपींस की मुद्रा पेसे 0.5 फीसदी गिर गई। ब्रिटिश पाउंड 37 वर्षों में डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर स्थिति में है। इसमें 1.75 फीसदी की गिरावट रही जिसमें मई के बाद से सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी। जापान की मुद्रा येन गिर कर 1985 के स्तर पर पहुंच गई है। हालांकि 1998 के बाद इसने बृहस्पतिवार को इसमें हस्तक्षेप किया।  

चीन का युआन 18 जून, 2020 के बाद निचले स्तर पर पहुंच गया है। येन के मुकाबले मार्च, 2020 के बाद डॉलर में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई जबकि यूरो भी 1.1 फीसदी गिरा। तुर्की की मुद्रा लिरा डॉलर की तुलना में रिकॉर्ड स्तर 18.38 पर पहुंच गई है। यहां सालाना महंगाई की दर 80.21 फीसदी है। सरकार ने लोगों को लीरा के लिए अपने डॉलर की अदला-बदली करने और उन्हें एक खाते में रखने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसमें लोगों को ब्याज दर के अलावा लीरा में डॉलर की तुलना में जितनी गिरावट आएगी, उतना का भुगतान होगा। 

ताइवान ने महंगाई पर काबू पाने के लिए कई अन्य दरों को 0.25 फीसदी बढ़ा दिया है। साथ ही इसने 2022 के लिए अर्थव्यवस्था में वृद्धि के अनुमान को भी घटा दिया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर यांग चिन- लांग ने कहा कि हमारी अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो गई है लेकिन ढेर सारी अनिश्चितताएं अभी भी हैं। इसने कहा कि आगे भी मौद्रिक नीतियों को कड़ा किया जाएगा। इसकी खुदरा महंगाई की दर 2.66 फीसदी है। यूके में महंगाई दर 9.9 फीसदी है जो 1982 के बाद सबसे ज्यादा है। इससे आयातित महंगाई में योगदान हो रहा है। यूके में लगातार 6 बार दरों में बढ़ोतरी की गई है। ऐसी आशंका है कि ब्रिटेन की महंगाई इस साल 13.1 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती है। यह लंबे समय तक रहेगी। 

दक्षिण अफ्रीका का केंद्रीय बैंक भी 0.75 फीसदी दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। केंद्रीय बैंक महंगाई की दर को 3 से 6 फीसदी के बीच लाने का लक्ष्य रखा है। हॉन्गकॉन्ग में ब्याज दर 3.5 फीसदी पहुंच गई है। सितंबर, 2018 के बाद इसने पहली बार दरों में इजाफा किया है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने 19 देशों के लिए तीन चौथाई की बढ़ोतरी दरों में की है जो अब तक की सबसे ज्यादा बढ़त है। इसका लक्ष्य अगस्त में महंगाई दर के 3.5 फीसदी को कम करना है। यूरोप के 19 देशों में जहां पर यूरो मुद्रा का चलन है, उनमें महंगाई की दर अगस्त में रिकॉर्ड 9.1 फीसदी रही। 

बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दर 1.75 फीसदी हो गई है जोपिछले 27 वर्षों में यह सबसे ज्यादा बढ़त है। मुद्रा में गिरावट और चार दशकों के उच्च स्तर पर पहुंची महंगाई की दर के कारण बैंक ने यह फैसला किया। यहां बढ़ रहीं खाद्य कीमतें और ऊर्जा की कीमतें जीवन जीने को और महंगा करती जा रही हैं। बढ़ती महंगाई से ग्राहकों की खरीदी ताकत कम होती जा रही है। पूरी दुनिया महंगाई का मुकाबला करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने का पारंपरिक तरीका अपना रही है। इससे लोगों की खरीदी की शक्ति घट जाती है और मांग कम हो जाती है। 

अमेरिका में इस साल ब्याज दरें 4.4 फीसदी तक जा सकती हैं। यह जून के अनुमान से एक फीसदी ज्यादा है। 2023 में यह 4.6 फीसदी तक जा सकता है। नार्वे की ब्याज दर 2.25 फीसदी हो गई है। यह साल 2011 के बाद सबसे उच्च स्तर पर है। इसका उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 6.5 फीसदी पर पहुंच गया है। कनाडा ने कहा कि वह अक्तूबर में 0.5 फीसदी ब्याज दरें बढ़ाएगा। 

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