सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा 50 फीसदी प्रोत्साहन 

नई दिल्ली। ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूत करने के प्रयासों की कड़ी में सरकार ने बुधवार को तीन योजनाओं को मंजूरी दी। इनमें सेमीकंडक्टर एवं डिस्प्ले निर्माण के विकास के लिए योजना में संशोधन, सौर पीवी मॉड्यूल के लिए 19,500 करोड़ रुपये की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति को मंजूरी देना शामिल है। 

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि देश में सेमीकंडक्टर फैब की स्थापना की योजना के तहत सभी प्रौद्योगिकी नोड्स के लिए परियोजना लागत के 50 फीसदी की एक समान वित्तीय मदद दी जाएगी। पहले अलग-अलग श्रेणी के लिए 30 फीसदी से 50 फीसदी तक प्रोत्साहन देने का प्रावधान था।  

इसी तरह, कंपाउंड सेमीकंडक्टर की आधुनिक प्रौद्योगिकी एवं प्रकृति के साथ उन्नत पैकेजिंग के लिए संशोधित कार्यक्रमों के तहत कंपाउंड सेमीकंडक्टर/ सिलिकॉन फोटोनिक्स/सेंसर आदि की स्थापना के लिए भी 50 फीसदी वित्तीय सहायता देने का फैसला किया गया है।  

उन्होंने बताया कि पहले सिर्फ 65 एनएम आकार तक के नोड्स के लिए प्रोत्साहन मिलता था, लेकिन अब सभी आकार के नोड्स के लिए प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही किसी एक इकाई के लिए 12,000 करोड़ रुपये के अधिकतम प्रोत्साहन की सीमा भी खत्म कर दी गई है। 

ठाकुर ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने की योजना ने कई वैश्विक सेमीकंडक्टर कंपनियों को आकर्षित किया है। ये संशोधन सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण योजना को मजबूत करेंगे। इससे देश के भीतर क्षमताएं बढ़ेंगी। इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर पैदा होंगे। संभावित निवेशकों से चर्चा के आधार पर उम्मीद है कि जल्द ही पहले सेमीकंडक्टर संयंत्र को स्थापित करने का काम शुरू हो जाएगा। 

देश में उच्च दक्षता के सौर पीवी मॉड्यूल के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 19,500 करोड़ रुपये के खर्च के साथ उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना (दूसरा चरण) के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इससे क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से करीब 94,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। साथ ही देश की सौर पीवी निर्माण क्षमता सालाना 65,000 मेगावाट बढ़ जाएगी। यह योजना 14 क्षेत्रों में लागू होगी। इसका लाभ सौर पीवी उत्पादन संयंत्रों के शूरू होने के बाद पांच साल तक मिलेगा।  

ठाकुर ने कहा कि सौर पीवी मॉड्यूल पर राष्ट्रीय कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल के निर्माण के लिए एक परिवेश तैयार करना और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में आयात निर्भरता को कम करना है। सौलर पीवी निर्माताओं का चयन पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। इस योजना से आयात के मोर्चे पर 1.37 लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। करीब दो लाख लोगों को प्रत्यक्ष और 7.80 लाख लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। 

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