जुलाई की तुलना में अगस्त में थोक महंगाई में आई कमी, 12.41 फीसदी रही 

मुंबई- अगस्त महीने में थोक मूल्य सूचकांक आधारित (WPI) महंगाई में गिरावट देखने को मिली है। ये 12.41% पर आ गई है। इससे पहले जुलाई में ये 13.93% और जून में ये 15.18% पर थी। हालांकि, थोक महंगाई लगातार 16वें महीने डबल डिजिट में बनी हुई है। जुलाई में थोक महंगाई 10 महीने के निचले स्तर पर आ गई है। इससे पहले सितंबर 2021 में WPI 13% से नीचे 10.66% आई थी। 

अगस्त में 9.93% खाद्य महंगाई दर पर पहुंच गई जो जुलाई में 9.41% थी। सब्जियों की महंगाई 18.25% से बढ़कर 22.29% हो गई। आलू की महंगाई 53.50% से कम होकर 43.56 पर बा गई है। अंडे, मीट और मछली की महंगाई 5.55% से बढ़कर 7.88% पर पहुंच गई है। प्याज की महंगाई -25.93 से से बढ़कर 24.76 हो गई है। फ्यूल और पावर इंडेक्स, जिसमें LPG, पेट्रोलियम और डीजल जैसे आइटम शामिल हैं, 43.75% से घटकर 33.67% हो गई। 

थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहना चिंता का विषय है। ये ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर को प्रभावित करती है। यदि थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक उच्च रहता है, तो प्रोड्यूसर इसे ग्राहक को पास कर देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को नियंत्रित कर सकती है। 

जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कर सकती है, क्योंकि उसे भी सैलरी देना होता है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है। 

खाने पीने का सामान खास तौर पर खाने का तेल और सब्जियों की कीमतें बढ़ने के कारण रिटेल महंगाई दर बढ़ी है। सोमवार को जारी किए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर अगस्त में बढ़कर 7% हो गई है। जुलाई में ये 6.7% थी। यह लगातार पांचवां महीना है जब महंगाई दर RBI की 6% की ऊपरी लिमिट के पार रही है। 

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