इंफोसिस ने कर्मचारियों को दी चेतावनी, एक मिनट में निकाल देगी 

मुंबई- अगर आप भी ऑफिस का काम निपटाने के बाद किसी दूसरी कंपनी के लिए काम करते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर नहीं है। आईटी इंडस्ट्री मूनलाइटिंग पर दो हिस्सों में बंट गई है। इंफोसिस ने अपने कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि अगर वे मूनलाइटिंग में शामिल पाए गए, तो उनकी नौकरी जा सकती है। इससे पहले विप्रो के चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने मूनलाइटिंग पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने सीधे-सीधे इसे धोखाधड़ी करार दिया था।  

रिशद प्रेमजी ने टेक इंडस्ट्री में मूनलाइटनिंग यानी कंपनी के काम के अलावा दूसरे काम करने को धोखेबाजी बताया था। अब इंफोसिस ने अपने कर्मचारियों को मेल लिखकर कड़ी चेतावनी दी है। 

ऑफिस के कामकाजी घंटों के बाद कर्मचारी द्वारा कोई दूसरी जॉब करना ही मूनलाइटिंग कहलाता है। एक कर्मचारी दिन में अपनी कंपनी में 9-5 की जॉब करता है। लेकिन वह एक्स्ट्रा पैसा कमाने के लिए रात में कोई दूसरी जॉब भी करता है। कोरोना महामारी के समय जब कर्मचारी ऑफिस की बजाय घर से काम करने लगे, तो मूनलाइटिंग का ट्रेंड बढ़ा। लोग एक्स्ट्रा पैसा कमाने के लिए जॉब के अलावा दूसरे प्रोजेक्ट्स पर भी काम करने लगे। कुछ लोग कई कंपनियों में एक साथ जॉब करने लगे। 

इंफोसिस ने अपने कर्मचारियों को एक मेल लिखा है। इस मेल का टाइटल नो टू टाइमिंग नो मूनलाइटिंग है। कंपनी ने मेल में कहा कि नियमों के अनुसार, कर्मचारियों को मूनलाइटिंग की अनुमति नहीं है। अगर कोई कर्मचारी ऐसा करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। उसे नौकरी से भी निकाला जा सकता है। इस तरह अब इंफोसिस के कर्मचारी ऑफिस के बाद किसी अन्य के लिए काम नहीं कर सकते। 

मूनलाइटिंग की एक दूसरी वजह स्किल्ड वर्कर्स की कमी भी है। मूनलाइटिंग का आइडिया व्हाइट कॉलर जॉब्स की बदलती प्रकृति की व्यावहारिक मान्यता को दर्शाता है। ऐसा लगता है कि मूनलाइटिंग ट्रेडिशनल टेक कंपनियों और नए जमाने की टेक कंपनियों को अलग कर रहा है।  

भारत में अधिकांश ट्रेडिशनल कंपनियों में यह नियम है कि कर्मचारी किसी दूसरी जगह काम नहीं कर सकता। एक कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज सर्वे में आईटी और आईटीईएस क्षेत्र के 400 लोगों से बात की गई थी। इनमें से 65 फीसदी लोगों ने बताया कि वे ऐसे लोगों को जानते हैं जो वर्क फ्रॉम होम के साथ मूनलाइटिंग कर रहे हैं। 

लॉ फर्म निशीथ देसाई एसोसिएट्स में एचआर लॉ प्रैक्टिस के प्रमुख विक्रम श्रॉफ कहते हैं कि भारत में सेंट्रलाइज्ड डेटाबेस नहीं है। नियोक्ताओं के लिए यह पता लगाना मुश्किल है कि कोई कर्मचारी किसी और कंपनी में भी उसी वक्त पर काम कर रहा है या नहीं। रोजगार की अवधि के दौरान कर्मचारी की अन्य स्रोतों से कोई वेतन या आय है या नहीं, यह पता लगाने के लिए नियोक्ताओं को कर्मचारी के टैक्स फाइलिंग या भविष्य निधि खाते की जांच करने की आवश्यकता हो सकती है। लेकिन बात प्राइवेसी से जुड़ी है। 

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