वित्तमंत्री ने कॉरपोरेट पर साधा निशाना, घरेलू कंपनियां निवेश से दूर क्यों 

मुंबई- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट पर निशाना साधा है। उन्होंने कंपनियों से पूछा कि जब विदेशी निवेशकों का भारत पर भरोसा है तो ऐसे में कॉरपोरेट जगत विनिर्माण में निवेश से पीछे क्यों हट रहा है। आखिर ऐसा क्या कारण है जो उन्हें निवेश से रोक रहा है। हालांकि उन्होंने भारतीय कॉरपोरेट की तुलना हनुमान से भी की और कहा कि वे सब कुछ कर सकते हैं और उनके लिए यह आसान है।  

एक कार्यक्रम में मंगलवार को वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार उद्योग के साथ जुड़ने को इच्छुक है और सभी तरह की समस्याओं को भी दूर करेगी। इस तर्ज पर सरकार ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना को भी शुरू किया है। इसके साथ कर की दरों में कटौती कर घरेलू उद्योगों को विनिर्माण क्षेत्र में निवेश के लिए भी प्रोत्साहित किया है। 

वित्त मंत्री ने कहा कि किसी भी नीति का अपने आप में अंत नहीं हो सकता है। जैसे-जैसे हम आगे बढ़ते हैं यह विकसित होती रहती है। मैं भारतीय उद्योग जगत से यह जरूर जानना चाहूंगी कि आखिर वे क्यों निवेश से झिझक  रहे हैं। हम उद्योगों को यहां लाने और निवेश करने के लिए सब कुछ करेंगे। पर यह बताना होगा कि आपको क्या रोक रहा है। 

निर्मला सीतारमण ने कहा कि विदेशी कंपनियां और देशों को लगता है कि भारत अब बेहतर स्थान है और यह एफडीआई और एफपीआई के निवेश में भी दिख रहा है। साथ ही शेयर बाजार के निवेशकों में भी विश्वास दिख रहा है। उन्होंने हनुमान की संज्ञा देते हुए कहा कि आप अपनी क्षमता पर विश्वास कीजिए। हालांकि, आप हनुमान हैं यह कौन बताएगा? यह सरकार का काम नहीं है। आप अपनी ताकत में विश्वास नहीं करते हैं। 

सीतारमण ने कहा कि हाल में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रुपये में कारोबार के तरीके को घोषित करने के बाद कई देश भारत के साथ रुपये में द्विपक्षीय कारोबार करने को इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि यह रूबल और रुपया नहीं है जो पुराने प्रारूप में था। आरबीआई ने ऐसे समय में इस तरीके को लाया है जो काफी महत्वपूर्ण था। 

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि भारत रुपये की गिरावट को बचाने के लिए कोई कोशिश नहीं कर रहा है। मुझे नहीं लगता है कि भारतीय बुनियादी चीजें ऐसी हैं कि हमें रुपये की रक्षा करने की जरूरत है। रुपया खुद देखभाल कर सकता है। आरबीआई इसके लिए जरूरी कदम उठा रहा है कि रुपया का प्रबंधन अर्थव्यवस्था के मूल सिद्धांतों के अनुरूप है। 

नागेश्वरन ने कहा कि आरबीआई यह सुनिश्चित कर रहा है कि बाजार के रुझान के अनुरूप रुपया जिस भी दिशा में आगे बढ़ रहा है वह धीरे-धीरे हो और आयातकों या निर्यातकों पर बोझ न पड़े। अगस्त में डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 80.15 पर पहुंच गया था जो अभी 79.25 पर है। 

विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट पर उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचाव का रूख पूंजी को यहां आने से रोक रहा है। निश्चित रूप से इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ रहा है। 2 सितंबर को विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 554 अरब डॉलर हो गया था जो 2020 के बाद सबसे कम है। 

नागेश्वरन ने कहा कि इस दशक में भारत की अर्थव्यवस्था सालाना 7 फीसदी की दर से बढ़ने में सक्षम हो सकती है। निवेश पर खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भी रफ्तार है। अप्रैल-जून में इसमें13.5 फीसदी की बढ़त दिखी थी। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का रुझान भले ही 6 फीसदी की वृद्धि दिखा रहा हो, पर हमारा मानना है कि यह सात फीसदी की दर से होगी। 

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने मंगलवार को कहा कि उभरते हुए एशियाई देशों के लिए अगले 12-18 महीने में महंगाई और आपूर्ति में बिखराव सबसे बड़ा जोखिम है। इन देशों में भारत, इंडोनेशिया, मलयेशिया, फिलीपींस, चीन, थाईलैंड और वियतनाम एवं अन्य हैं। एक सर्वे में इसने कहा कि इन दोनों जोखिम के अलावा बढ़ती ब्याज दरें और अर्थव्यवस्था में धीमी वृद्धि दर भी जोखिम ही है। 

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