वित्तमंत्री ने कहा, आरबीआई महंगाई पर काबू पाने के लिए बिठाए तालमेल 

मुंबई- वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को महंगाई पर काबू पाने के लिए राजकोषीय नीति और अन्य कारकों के साथ अधिक बेहतर ढंग से तालमेल बिठाना होगा। उन्होंने आर्थिक थिंक टैंक इक्रियर की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि मुद्रास्फीति प्रबंधन को केवल मौद्रिक नीति पर नहीं छोड़ा जा सकता है। यह कवायद कई देशों में पूरी तरह से अप्रभावी साबित हुई है। 

वित्त मंत्री ने कहा, ‘आरबीआई को कुछ हद तक तालमेल बिठाना होगा। हो सकता है कि वर्तमान में यह तालमेल उतना न हो, जितना कि अन्य पश्चिमी विकसित देश में होता है। मैं रिजर्व बैंक को कुछ बता नहीं रही हूं। मैं आरबीआई को कोई आगे का निर्देश नहीं दे रही हूं, लेकिन सच्चाई यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए मौद्रिक नीति के साथ ही राजकोषीय नीति पर भी काम करना होगा।  

उन्होंने कहा कि ऐसी कई अर्थव्यवस्थाएं हैं जहां नीति को इस तरह तैयार किया गया है कि मुद्रास्फीति को संभालने के लिए मौद्रिक नीति और ब्याज दर प्रबंधन एकमात्र साधन हैं। सीतारमण ने कहा, ‘मैं कहूंगी कि भारत का मुद्रास्फीति प्रबंधन कई अलग-अलग गतिविधियों की साझा कवायद है और जिनमें से ज्यादातर आज की परिस्थितियों में मौद्रिक नीति से बाहर है।’ 

कार्यक्रम के दौरान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा है कि मैं रूस से कच्चा तेल खरीदने का फैसला लेने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का सम्मान करती हूं। वित्तमंत्री ने कहा कि रूस से तेल खरीदना सही फैसला है क्योंकि वे छूट पर कच्चा तेल मुहैया कराने को तैयार हैं। वित्त मंत्री ने कहा है कि हमारे पूरे आयात में रूस का हिस्सा 2% था जो कच्चा तेल का आयात शुरू होने के बाद 12-13% तक बढ़ गया।

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