वैल्यू इन्वेस्टिंग लॉंग टर्म में धन बनाने का सबसे अच्छा तरीका है 

मुंबई- भारत में वैल्यू इन्वेस्टमेंट की बात जब आती है, तो मनी मैनेजमेंट इंडिया के अनुसार देश में वैल्यू फंड को अनिवार्य करने के लिए सिर्फ एक ही सच है और वह है आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू डिस्कवरी फंड। यह निष्कर्ष वैल्यू फंड ब्रह्मांड के भीतर उपलब्ध इक्विटी म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो के ‘स्टाइल फैक्टर’ विश्लेषण का परिणाम था। एक और निष्कर्ष यह निकला कि भारत में अधिकांश इक्विटी फंड विकास-आधारित हैं। इस रिसर्च के लिए मनी मैनेजमेंट इंडिया ने मॉर्निंगस्टार द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटा और ओपनक्यू के फैक्टर एनालिसिस टूल पर भरोसा किया। 

द मनी हंस एंड मनी मैनेजमेंट इंडिया की संस्थापक हांसी मेहरोत्रा कहती हैं कि म्यूचुअल फंड का चयन करते समय निवेशकों को एएमसी और व्यक्तिगत फंड के निवेश के दर्शन और तरीके को समझने की जरूरत है। इससे उन्हें यह पता चल जाएगा कि बाकी फंडों की तुलना में यह फंड कब और कैसा प्रदर्शन करेगा, पर ऐसा करना आसान नहीं होता है। क्योंकि इंडस्ट्री वैल्यू इन्वेस्टिंग जैसे शब्दों का बहुत ही कम इस्तेमाल करती है।  

मॉर्निंगस्टार के विश्लेषण के अनुसार, 218 के बाद जिन कई फंडों को वैल्यू कैटेगरी में फिर से वर्गीकृत किया गया उनके पोर्टफोलियो में भी ग्रोथ स्टॉक होल्डिंग में गिरावट दिखाई दे रही है। इसलिए कई तथाकथित वैल्यू फंड रिलेटिव वैल्यू अप्रोच का पालन करते हैं। 

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू डिस्कवरी फंड उन कुछ म्यूचुअल फंडों में से है, जिन्हें मॉर्निंगस्टार द्वारा गोल्ड रेटिंग दी गई है। फंड का प्रबंधन आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के ईडी और सीआईओ एस नरेन द्वारा किया जाता है, जो भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में सबसे अनुभवी मैनेजरों में से एक है। इन वर्षों में उन्होंने अपने द्वारा प्रबंधित धन के आधार पर एक दमदार ट्रैक रिकॉर्ड बनाया है। चूंकि नरेन निवेश की वैल्यू स्टाइल के प्रैक्टिशनर रहे हैं, इसलिए फंड की स्ट्रेटेजी उन्हें अपनी ताकत से खेलने की अनुमति देती है।

संयोग से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू डिस्कवरी फंड ने हाल ही में 18 साल पूरे किए हैं। इस स्कीम का एयूएम रु. 24,694 करोड़ जो वैल्यू कैटेगरी में कुल एयूएम का लगभग 30% है। यह स्कीम में वैल्यू इन्वेस्टिंग में निवेशक के विश्वास (investor trust) को दर्शाता है।  


अगर किसी निवेशक ने स्थापना के समय (16 अगस्त, 2004) इस फंड में 10 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश किया होगा तो उसकी कीमत 31 जुलाई, 2022 2.5 करोड़ होगी। यानी सालाना 19.7% का सीएजीआर रिटर्न मिला है। निफ्टी 50 में इसी तरह के निवेश से 15.6 फीसदी का सीएजीआर रिटर्न मिलता और कुल कीमत 1.3 करोड़ रुपये होती। चूंकि वैल्यू इन्वेस्टिंग लॉंग टर्म के निवेश के लिए उपयुक्त होता है तो एसआईपी एक अच्छा निवेश का मार्ग बन जाता है।  

फंड की स्थापना के बाद से एसआईपी के माध्यम से 10,000 रुपये का मासिक निवेश के तहत कुल 21.6 लाख रुपये का निवेश किया गया होगा। 31 जुलाई, 2022 तक यह बढ़कर 1.2 करोड़ रुपये हो गया होगा जिसका सीएजीआर 17.3% होता है।

फंड का लांग टर्म अनुभव उत्साहजनक रहा है और ऐसे में नरेन का कहना है कि वैल्यू फंड में निवेश करते समय धैर्य का बहुत महत्व होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि बाजार के ऐसे फेज होंगे जब मूल्य कमजोर होगा। इसलिए, निवेशकों को धैर्य रखने और निवेश में बने रहने की आवश्यकता होगी और जब चक्र बदल जाता है, तो इतिहास गवाह है कि धैर्य का भरपूर लाभ मिलता है। उन्होंने आगे कहा, “ऐसे समय में वैल्यू इन्वेस्टिंग करना जब बाजार ऊंचा होता है, अच्छा प्रदर्शन करता है और वैल्यू उन सेक्टर्स में निवेश करने पर केंद्रित होता है जो आउट ऑफ फ़ेवर हैं लेकिन उनमें लांग टर्म संभावनाएं हैं। 

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