हिंदी फिल्मों पर सर्वाधिक टैक्स 60 फीसदी यूपी में, 50 फीसदी बिहार में 

मुंबई- हिंदी फिल्मों की बुरी हालत के कई कारण हैं। एसबीआई की एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि घटती सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की संख्या और भारी भरकम टैक्स के कारण बॉलीवुड की कमाई पर कैंची चल रही है।  

रिपोर्ट के अनुसार फिल्में मल्टीप्लेक्स में प्रदर्शित हो रही हैं। इस वजह से दर्शक घट रहे हैं क्योंकि मल्टीप्लेक्स के टिकट की कीमत एक स्क्रीन की तुलना में 4 गुना ज्यादा है। एक स्क्रीन सिनेमाघर के 62 फीसदी सिनेमाघर दक्षिण भारत में हैं। उत्तर भारत में केवल 16 फीसदी और पश्चिमी भारत में केवल 10 फीसदी सिनेमाघर हैं। यह भी एक कारण है कि दक्षिण भारत में स्थानीय फिल्में बॉलीवुड की तुलना में ज्यादा राजस्व कमाती हैं। 

हिट बॉलीवुड फिल्मों का लाइफ टाइम बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का 40 से 45 फीसदी हिस्सा गैर मल्टीप्लेक्स सिनेमाघरों से आता है। इसलिए एक स्क्रीन वाले सिनेमाघरों की घटती संख्या और दक्षिण भाषा की फिल्मों की बढ़ती बाजार हिस्सेदारी के बाद फिल्म निर्माताओं और वितरकों को सोचना चाहिए। 

रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी, 2021 से प्रदर्शित हुईं 43 हिंदी फिल्मों की औसत रेटिंग 5.9 थी जबकि 18 फिल्में जो हिंदी में डब की गईँ उनकी रेटिंग रेटिंग 7.3 थी। इसी तरह से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अब अलग तरीके की विशेषता के साथ आ रहे हैं जैसे एक्शन, हॉरर, ड्रामा, थ्रीलर और कॉमेडी से भरपूर हैं। यह युवाओं को ज्यादा आकर्षित करती हैं। 

रिपोर्ट के मुताबिक, ओटीटी (ओवर द टॉप) की वजह से भारतीय मनोरंजन उद्योग ज्यादा बिखर रहा है। भारत में ओटीटी ग्राहकों की संख्या 45 करोड़ है जो अगले साल के अंत तक 50 करोड़ हो सकती है। देश में 2018 में इसका बाजार केवल 2,590 करोड़ रुपये का था जो 2021 तक 11,944 करोड़ तक जा सकता है। इसका असर सिनेमाघरों के ग्राहकों और कमाई पर होगा।  

50 फीसदी लोग महीने में 5 घंटे से ज्यादा ओटीटी का उपयोग करते हैं। साथ ही स्मार्ट टीवी का भी असर हो रहा है। ओटीटी सिनेमाघरों को उसी तरह से बर्बाद कर सकता है जैसे साल 2000 में मल्टीप्लेक्स के उदय ने वीसीआर, वीसीपी के साथ डीवीडी और एकल स्क्रीन के साम्राज्य को खत्म कर दिया था। 

कोरोना से पहले सालाना 70-80 हिंदी फिल्में रिलीज होती थीं। इनकी कमाई 3,000 से 5,500 करोड़ रुपये होती थी। पर कोरोना से जनवरी, 2021 के बाद से कुल 61 फिल्में हिंदी में रिलीज हुईं। इसमें दक्षिण और इंगलिश की डब फिल्में भी थीं। 11 अगस्त, 2022 तक इनकी कुल कमाई 3,200 करोड़ रुपये थी। इसमें से 48 फीसदी हिस्सा 18 डब फिल्मों से आया। 

टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया और कई कारण हैं जिनसे सिनेमाघर में लोग कम आ रहे हैं। खासकर उच्च गति वाले इंटरनेट की सुविधा और डिजिटल पेमेंट भी इसका प्रमुख कारण है। नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो, डिज्नी हाटस्टार जैसी कंपनियां भारत में अमेरिका की तुलना में 70-90 फीसदी सस्ता ऑफरिंग कर रही हैं। सोनीलिव, वूट, जी5, अल्टबालाजी जैसी कंपनियां भी हिंदी में अच्छा खासा फोकस कर रही हैं। 

2016 में कुल 71 हिंदी फिल्में रिलीज हुई थीं। इसमें कुछ ओरिजिनल थीं तो कुछ डब की गई थीं। इनकी कमाई 4,648 करोड़ रुपये थी। 2017 में 81 फिल्मों की कमाई 5,089 करोड़, 2019 में 73 फिल्मों की 7,277 करोड़ और 2020 में कोरोना की वजह से केवल 13 फिल्मों आई जिनकी कमाई 783 करोड़ रुपये थी। 2021 में 23 फिल्मों ने 1,235 और 2022 में अब तक 38 फिल्मों ने 3,299 करोड़ रुपये की कमाई की।  

जनवरी, 2021 के बाद से कुल 43 फिल्में ओरिजिनल और 18 डब फिल्में रिलीज हुईं। ओरिजिनल फिल्मों ने 1644 करोड़ और डब फिल्मों ने 1,553 करोड़ रुपये की कमाई की। फिल्मों पर ज्यादा टैक्स लगाने वाले प्रमुख राज्यों में यूपी 60 फीसदी, बिहार 50 फीसदी, दिल्ली 40 फीसदी और हरियाणा 20 फीसदी लगाता था। हिमाचल, पंजाब और राजस्थान में कोई भी मनोरंजन टैक्स नहीं लगता है।  

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