आटा निर्यात पर प्रतिबंध, खाद्य तेल से अब ग्राहकों की ठगी पर रोक 

मुंबई- सरकार ने गेहूं के आटे की कीमतें थामने और खाद्य तेलों के मामले में अनुचित व्यापार व्यवहार रोकने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। घरेलू बाजार में बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए एक ओर जहां आटे के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है, दूसरी ओर खाद्य तेल कंपनियों को लेबल में तापमान के बदले शुद्ध मात्रा और वजन का उल्लेख करने का निर्देश दिया गया है। 

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की केंद्रीय कैबिनेट (सीसीईए) ने बृहस्पतिवार को नियमों में संशोधन कर गेहूं के आटे के निर्यात पर रोक को मंजूरी दे दी। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इस फैसले से अब आटे के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की मंजूरी होगी। सरकार के इस कदम से न सिर्फ उच्च महंगाई के बीच आटे की बढ़ती कीमतों से आम लोगों को राहत मिलेगी बल्कि समाज के सबसे कमजोर तबकों के लिए खाद्य सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) जल्द ही इसे लेकर अधिसूचना जारी करेगा।   

बयान में कहा गया है कि इससे पहले गेहूं के आटे के निर्यात पर रोक या कोई प्रतिबंध नहीं लगाने की नीति थी। ऐसे में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और देश में आटे की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए इसके निर्यात पर प्रतिबंध/प्रतिबंधों से छूट को वापस लेने के लिहाज से नीति में आंशिक संशोधन की जरूरत थी। 

सरकार ने देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मई में गेहूं के निर्यात पर पहले ही रोक लगा दी है। हालांकि, इससे गेहूं के आटे की विदेशी मांग में तेजी आई। इससे भारत से आटे का निर्यात इस साल अप्रैल-जुलाई में सालाना आधार पर 200 फीसदी बढ़ गया।   

दरअसल, रूस और यूक्रेन गेहूं के प्रमुख निर्यातक देश हैं। दोनों देशों की वैश्विक गेहूं व्यापार में करीब एक चौथाई हिस्सेदारी है। रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध से दुनियाभर में गेहूं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे भारतीय गेहूं की मांग में इजाफा हुआ है, जिससे घरेलू बाजार में गेहूं की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। 

खाद्य तेल कंपनियां उपभोक्ताओं अब तापमान के बहाने पैकिंग में कम तेल नहीं दे पाएंगी। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने खाद्य तेल विनिर्माताओं, पैकेजिंग करने वालों और आयातकों को लेबल पर अपने उत्पाद का वजन बिना तापमान के उसकी शुद्ध मात्रा के अनुसार बताने को कहा है। लेबल में सुधार के लिए 15 जनवरी, 2023 तक का समय दिया गया है। अनुचित व्यापार व्यवहार के संबंध में खाद्य तेल ब्रांड के खिलाफ बढ़ती उपभोक्ता शिकायतों के बीच यह कदम उठाया गया है। 

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