30 सितंबर तक टोकनाइजेशन अनिवार्य, पहले अंतिम तारीख 31 जुलाई थी 

मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 30 सितंबर तक टोकनाइजेशन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अनिवार्य कर दिया है। ऑनलाइन, पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) और एप लेनदेन में उपयोग किए जाने वाले सभी क्रेडिट और डेबिट कार्ड डेटा को यूनिक टोकन से बदलने की यह पद्धति है। इसमें टोकनाइजेशन के उच्च स्तर की सुरक्षा कार्डधारकों के भुगतान अनुभव को बेहतर करेगी। पहले इसकी अंतिम तारीख 31 जुलाई थी और अब इसे तीन महीने बढ़ा दिया गया है। 

जून में आरबीआई ने कहा था कि कुल 19.5 करोड़ टोकन का निर्माण किया गया था। ग्राहकों को सुरक्षित लेन देन करने में मदद करने के लिए आपके कार्ड का विवरण एनक्रिप्टेड टोकन के रूप में संग्रहित किया जाएगा। ये टोकन ग्राहकों के विवरण का खुलासा किए बिना भुगतान करने की मंजूरी देंगे। आदेश के अनुसार, कार्ड के आंकड़े को डिजिटल टोकन से बदलना जरूरी होगा। इस टोकन में आपके कार्ड के चार अंक ही दिखेंगे और इसे ही टोकन माना जाएगा। इसके लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। 

टोकनाइजेशन की व्यवस्था वैकल्पिक होगी। ग्राहक चाहे तो इसे चुन सकते हैं। अगर वे इसे नहीं चुनते हैं तो फिर उनको हर बार लेन देन के लिए कार्ड की पूरी जानकारी देनी होगी। अभी तक एक बार के लेन देन पर संबंधित वेबसाइट कार्ड का विवरण रख लेती थी। पर अब ऐसा नहीं होगा। 

टोकनाइजेशन का मूल उद्देश्य ऑन लाइन धोखाधड़ी करने वालों से सुरक्षित रखने का है। अभी तक हर क्रेडिट और डेबिट कार्ड से भुगतान करने पर उसकी जानकारी मर्चेंट के पास या ऑन लाइन कारोबारियों के पास रहती है। अब टोकनाइजेशन से ऐसी जानकारी किसी के पास नहीं होगी। आरबीआई के निर्देश के मुताबिक, डेबिट या क्रेडिट कार्ड की जानकारी कार्ड जारीकर्ता या नेटवर्क के अलावा किसी अन्य संस्था द्वारा संग्रहित नहीं की जा सकती है। 

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