सुप्रीमकोर्ट ने रामदेव की फिर खिंचाई की, कहा दूसरों का करें सम्मान 

मुंबई- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एलोपैथी जैसी आधुनिक चिकित्सा प्रणाली और डॉक्टरों के खिलाफ बयान देने के लिए बाबा रामदेव की खिंचाई की। शीर्ष अदालत ने कहा, हम रामदेव का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें अन्य चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए। कोर्ट इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। 

सीजेआई एनवी रमण, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने रामदेव पर मौखिक टिप्पणी की। याचिका में टीकाकरण अभियान और आधुनिक दवाओं के खिलाफ नकारात्मक विज्ञापनों को नियंत्रित करने की मांग की गई थी। सीजेआई ने कहा, बाबा रामदेव को क्या हुआ? वह अपनी प्रणाली को लोकप्रिय बना सकते हैं लेकिन उन्हें अन्य प्रणालियों की आलोचना क्यों करनी चाहिए।  

अदालत ने कहा, हम सभी उनका सम्मान करते हैं। उन्होंने योग को लोकप्रिय बनाया लेकिन उन्हें अन्य प्रणालियों की आलोचना नहीं करनी चाहिए। क्या गारंटी है कि उनकी प्रणाली काम करेगी? वह एलोपैथी को नकार नहीं सकते। उन्हें अन्य प्रणालियों के खिलाफ बयान देने में संयम बरतना चाहिए। 

पीठ ने आईएमए की इस याचिका पर केंद्र सरकार, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारतीय विज्ञापन मानक परिषद, भारतीय केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (रामदेव द्वारा संचालित कंपनी) को नोटिस जारी किया।  

आईएमए की ओर से तर्क दिया गया कि आयुष कंपनियों द्वारा आम जनता को गुमराह करने के लिए अपमानजनक बयान दिए गए हैं। पिछले हफ्ते दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बाबा रामदेव को आयुर्वेद के बारे में भ्रामक दावे करने से परहेज करने को कहा था। अदालत ने कहा था, आपके अनुयायी होने के लिए आपका स्वागत है लेकिन कृपया यह कहकर जनता को गुमराह न करें। 

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