19 सालों में सबसे तेज रिकवरी शेयर बाजार में इस बार   

मुंबई- भारतीय शेयर बाजार में करीब 2 दशकों की सबसे तेज रिकवरी हुई है। निवेशकों को डर और अचरज दोनों हैं कि क्या वैश्विक अस्थिरता के बीच विदेशी खरीदारी की यह रफ्तार जारी रहेगी? जून के मध्य के निचले स्तर से एनएसई निफ्टी-50 इंडेक्स में 14 फीसदी से अधिक का उछाल दर्ज हुआ था। महीनों तक बिकवाल रहने के बाद विदेशी निवेशकों की खरीदारी शुरू होने से यह तेजी आई। 

विदेशी निवेशकों की खरीदारी से बाजार में तेजी से रिकवरी हुई। इससे केवल 39 सत्रों में बाजार ओवरसोल्ड क्षेत्र से मजबूत ओवरबॉट जोन में आ गया। यह साल 2003 के बाद बाजार में सबसे तेज रिकवरी है। डॉलर के कमजोर होने और कमोडिटी की कीमतों में अपेक्षा से अधिक तेजी से गिरावट के बीच विदेशी निवेशक भारत में शुद्ध बिकवाल से शुद्ध खरीदार हुए हैं।  

तेल और बेस मेटल्स सहित कमोडिटीज की कीमतें जून में पीक स्तर से 10 से 20 फीसदी गिर गईं। यह भारत जैसे शुद्ध आयातकों के लिए बड़ी राहत है। बैंक ऑफ अमेरिका के विश्लेषक अमीश शाह ने कहा, “हमें उम्मीद नहीं थी कि वैश्विक कारकों में इतनी जल्दी सुधार होगा।” उन्होंने कहा, “लो पोजिशनिंग” और अन्य उभरते बाजारों में कुछ निवेश विकल्पों के कारण वैश्विक निवेशकों का इनफ्लो फिर से शुरू हुआ।  

शाह भी विदेशी खरीदारी की स्थिरता को लेकर संशय में हैं। उन्होंने कहा कि ग्रोथ पर फोकस करने के लिए चीन की आर्थिक नीति में बदलाव हो सकते हैं। इससे क्रूड और दूसरी कमोडिटी की कीमतों में तेजी आ सकती है। घरेलू शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 872.28 अंक लुढ़ककर बंद हुआ। शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) सोमवार को 475 करोड़ के शेयर बेचे। 

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