मंदी की आशंका से कच्चे तेल की कीमतें 6 माह के निचले स्तर पर 

मुंबई- वैश्विक मंदी की आशंका के कारण बुधवार को कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 6 माह के निचले स्तर पर पहुंच गईं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 91.51 डॉलर पर पहुंच गई जो फरवरी के बाद का निचला स्तर है। जबकि डब्ल्यूटीआई की कीमत भी गिरकर 86.33 डॉलर पर पहुंच गई। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट आगे कभी भी थम सकती है।  

कहा जा रहा है कि चीन में कोविड प्रतिबंधों की अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर वृद्धि दर में जोखिम के कारण तेल की कीमतों पर असर दिख रहा है। साथ ही अमेरिका में बढ़ते स्टॉक से मांग भी घट रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें लगातार गिर रही हैं।  

पिछले दो महीने में कच्चे तेल की कीमत करीब 30 फीसदी और एक महीने में 18 फीसद गिरी है। इससे आने वाले समय में भारत में कच्चे तेल का भाव घट भी सकता है। क्योंकि भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करता है। 

भारत में पेट्रोलियम उत्पादों जैसे पेट्रोल और डीजल की मांग 2022 में 7.73 फीसदी बढ़ने की उम्मीद है। तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक ने कहा कि भारत में तेल उत्पादों का अनुमान 2021 में 4.77 मिलियन बैरल प्रति दिन से बढ़कर 2022 में 5.14 मिलियन बैरल प्रति दिन हो सकता है। देश में तेल की वृद्धि  दुनिया में सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीसरी तिमाही में तेल की मांग में गिरावट आ सकती है लेकिन त्योहारी और छुट्टियों के मौसम में इसमें फिर तेजी आ सकती है। 

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