कृषि कर्ज पर ब्याज में 1.5 फीसदी की छूट, आपात ऋण का दायरा भी बढ़ा 

मुंबई- केंद्र सरकार ने बुधवार को किसानों को बड़ी राहत देते हुए तीन लाख रुपये तक के लघु अवधि के कर्ज पर 1.5 फीसदी ब्याज सहायता (इंटरेस्ट सबवेंशन) को मंजूरी दे दी। इस कदम से किसानों को कम ब्याज पर कर्ज मिलता रहेगा। बैंकों और कर्ज देने वाले अन्य वित्तीय संस्थानों पर भी इसका बोझ नहीं पड़ेगा।  

इसके अलावा, सरकार ने आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) के खर्च को 50,000 करोड़ रुपये बढ़ाकर 5 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। 

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सभी वित्तीय संस्थानों के लिए लघु अवधि के कृषि कर्ज के लिए 1.5 फीसदी ब्याज सहायता योजना बहाल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।  

कर्ज देने वाले संस्थानों (सरकारी एवं निजी बैंक, छोटे वित्त बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक और कंप्यूटरीकृत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों) को 2022-23 से 2024-25 के लिए किसानों को दिए गए तीन लाख रुपये तक के लघु अवधि के कर्ज के एवज में 1.5 फीसदी की ब्याज सहायता दी जाएगी। 

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, ब्याज सहायता योजना के तहत 2022-23 से 2024-25 के लिए 34,856 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजटीय प्राधवान करने होंगे। इस योजना की मदद से कृषि क्षेत्र में कर्ज का प्रवाह बना रहेगा। वित्तीय संस्थानों की वित्तीय सेहत और कर्ज को लेकर व्यवहार्यता सुनिश्चित होगी। 

किसानों को ब्याज सहायता देने संबंधी योजना का लाभ पशुपालन, डेयरी, मछली पालन, पॉल्ट्री समेत कृषि संबंधी तमाम गतिविधियों से जुड़ने वालों को मिलेगा। इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के मोर्चे पर भी मदद मिलेगी। 

बैंक किसानों को कम-से-कम ब्याज पर कर्ज दे सकें, इसके लिए सरकार ने इंटरेस्ट सबवेंशन योजना (आईएसएस) पेश की थी। इसका नाम बदलकर मोडिफाइड इंटरेस्ट सबवेंशन योजना (एमआईएसएस) हो गया है। इसके तहत खेती-बाड़ी, पशुपालन, डेयरी, मुर्गीपालन और मछली पालन जैसे कामों के लिए किसानों को 7 फीसदी सालाना ब्याज पर 3 लाख रुपये का कर्ज मिलता है। 

-किसान अगर समय पर कर्ज का भुगतान करते हैं तो उन्हें ब्याज में 3 फीसदी की अतिरिक्त छूट मिलती है। यानी उन्हें 4 फीसदी ब्याज पर लघु अवधि के लिए कर्ज मिलता है। 

ईसीएलजीएस के तहत खर्च का दायरा बढ़ाने से कोरोना महामारी से प्रभावित होटल एवं इससे जुड़े क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। 2022-23 के बजट में इन क्षेत्रों की मदद के लिए योजना की सीमा को 4.5 लाख करोड़ से बढ़ाकर 5 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव था। अनुराग ठाकुर ने बताया कि होटल और इससे जुड़े क्षेत्रों को महामारी के दौरान हुए नुकसान से उबारने के लिए राशि बढ़ाई गई है। ईसीएलजीएस के तहत 5 अगस्त, 2022 तक करीब 3.67 लाख करोड़ रुपये के कर्ज स्वीकृत किए जा चुके हैं। 

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