रतन टाटा बुजुर्गों का रखेंगे ख्याल, इस कंपनी में किया निवेश 

मुंबई- रतन टाटा ने ‘गुडफेलोज’ (goodfellows) नाम के एक स्टार्टअप में निवेश का ऐलान किया। यह स्टार्टअप बुजुर्गों का ख्याल रखेगा। शांतनु नायडू कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से पढ़े हुए हैं। एमबीए डिग्री हासिल करने के बाद नायडू 2018 में भारत लौटे। टाटा ट्रस्टों के चेयरमैन ऑफिस में उन्‍होंने बतौर डिप्टी जनरल मैनेजर जॉइन किया। गुड फेलोज शांतनु का ही स्टार्टअप है। 

रतन टाटा ने एक स्टार्टअप गुडफेलोज में निवेश की घोषणा की। हालांकि, निवेश की रकम के बारे में नहीं बताया गया। यह वरिष्‍ठ नागरिकों के लिए देश का पहला कम्‍पैनियनशिप स्‍टार्टअप है। इसका मकसद युवाओं और शिक्षित ग्रेजुएट्स को सहयोग के लिए जोड़कर बुजुर्गों की मदद करना है। पिछले छह महीनों में ‘गुडफेलोज’ ने एक सफल बीटा पूरा कर लिया है। अब यह मुंबई और जल्द ही पुणे, चेन्नई और बेंगलुरु में उपलब्ध होगा। 

भारत में 5 करोड़ बुजुर्ग अकेले रहते हैं। इसका कारण या तो अपने जीवनसाथी को खोना है या फिर परिवार के सदस्‍यों का बाहर बस जाना। गुडफेलोज का बिजनेस मॉडल एक ‘फ्रीमियम’ सब्सक्रिप्शन मॉडल है। दादाजी को इस सेवा का अनुभव कराने के लक्ष्य के साथ पहला महीना मुफ्त है। दूसरे महीने के बाद एक छोटा सा सदस्यता शुल्क है जो पेंशनभोगियों के सीमित सामर्थ्य के आधार पर तय किया गया है। गुडफेलोज नौकरी की तलाश में स्नातकों को शॉर्ट-टर्म इंटर्नशिप के साथ रोजगार भी मुहैया कराता है। 

टाटा ने इस मौके पर बोले कि जब तक आप वास्तव में बूढ़े नहीं हो जाते, तब तक किसी को भी बूढ़े होने का मन नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि एक अच्छे स्वभाव वाला साथी प्राप्त करना भी एक चुनौती है। वहीं, नायडू ने टाटा को एक बॉस, एक संरक्षक और एक मित्र के रूप में संबोधित किया। 

पिछले साल 28 दिसंबर को रतन टाटा ने अपना 84वां जन्मदिन मनाया था। इस दौरान टाटा संस के चेयरमैन एमेरिटस के साथ शांतनु का वीडियो खूब वायरल हुआ था। इस वीडियो में वह रतन टाटा को केक खिलाते और उनके कंधे पर हाथ रखते दिखाई दिए थे। टाटा में काम करने वाले शांतनु अपने परिवार की 5वीं पीढ़ी हैं। वह सितंबर 2014 से टाटा ट्रस्ट के साथ काम कर रहे हैं। 

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