एमएसएमई को खड़ा होने के लिए बैंक ज्यादा और तत्परता से दें कर्ज  

लखनऊ। एमएसएमई एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ने बैंकों से अपील की है कि वे इस क्षेत्र को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए अधिक और तत्परता से कर्ज दें। काउंसिल ने कहा कि कोविड-19 के कारण यह क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित है। खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में शिल्प, कला और कृषि आधारित इकाइयों को अपना अस्तित्व बचाने के लिए ज्यादा कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसे में इन उद्योगों को समय से और वाजिब दर पर कर्ज देने की फौरी जरूरत है। 

काउंसिल के अध्यक्ष डीएस रावत ने कहा, एमएसएमई के लिए समय से पूंजी उपलब्ध नहीं हो पाना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके कारण या तो इन औद्योगिक इकाइयों का कारोबार सिमट जाता है या फिर वे बिलकुल ही बंद हो जाती हैं। एसोचैम के पूर्व महासचिव ने कहा, ऐसे में यह जरूरी है कि एमएसएमई के लिए उपलब्ध वित्तपोषण के दायरे को और बढ़ाया जाए, ताकि यह क्षेत्र समावेशी विकास और रोजगार को बढ़ावा देने में योगदान जारी रख सके। वैश्विक स्तर पर फिनटेक में सालाना 15 फीसदी की दर से निवेश बढ़ रहा है। 

उन्होंने कहा कि सरकार को वित्तीय प्रौद्योगिकी (फिनटेक) सेवाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए। क्योंकि यह ग्राहकों के लिए मददगार है। इससे बैंकों पर निर्भरता कम होती है। रावत ने कहा, अगर फिनटेक सेवाओं को प्रभावशाली ढंग से लागू किया जाए तो एमएसएमई में हर साल कम से कम 50 लाख प्रत्यक्ष और इतने ही अप्रत्यक्ष अतिरिक्त अवसर पैदा होंगे। 2021 तक फिनटेक उद्योग 50 अरब डॉलर के स्तर को छू चुका है। 

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